एम डी न्यूज़
बरेली के आईएमए भवन में चल रहे इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के वार्षिक अधिवेशन आईएमए यूपीकॉन-2025 में पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. दीपक तलवार ने बताया कि इंटरस्टीशियल लंग डिजीज (आईएलडी) कैंसर से भी ज्यादा खतरनाक होती है। इसे हाइपोसेंसिटिव ह्यूमेनाइटिस यानी फार्मर्स लंग भी कहा जाता है। आधे से ज्यादा फेफड़े खराब होने पर ही इसका पता चलता है।उन्होंने कहा कि आईएलडी की चपेट में आने वाले व्यक्ति में करीब पांच साल बाद लक्षण उभरते हैं। इलाज शुरू होने पर अगले चार-पांच साल ही मरीज की जीवन प्रत्याशा होती है। इसके बाद लंग ट्रांसफर ही विकल्प है। इसका अब तक कोई ठोस इलाज नहीं मिला है। लक्षण आधारित दवाएं दी जाती हैं। अगर समय से रोग का पता चल जाए तो इसे दवाओं से नियंत्रित कर सकते हैं।वरिष्ठ चेस्ट फिजिशियन डॉ. वीके धस्माना ने कहा कि ज्यादातर डॉक्टरों को इस रोग के बारे में नहीं पता। इसलिए वायरल सर्दी, जुकाम, खांसी का इलाज करते हैं। ज्यादा दिक्कत होने पर टीबी का इलाज शुरू कर देते हैं। यही वजह है कि आईएलडी ट्रैक होने तक देर हो चुकी होती है।
रिपोर्टर गौरव कुमार एम डी न्यूज़ बरेली

