कुंवरगांव में झोलाछाप डॉक्टरों का जाल, कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति

रिपोर्टर प्रदीप पाण्डेय बदायूं

जनपद बदायूं,कुंवरगांव क्षेत्र में झोलाछाप डॉक्टरों का अवैध नेटवर्क बेखौफ तरीके से फल-फूल रहा है। कस्बे में दो दर्जन से अधिक ऐसे तथाकथित डॉक्टर बिना किसी मान्यता और पंजीकरण के क्लीनिक संचालित कर रहे हैं, जो सीधे तौर पर मरीजों की जान से खिलवाड़ है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई सिर्फ कागजी साबित हो रही है। हाल ही में एसीएमओ द्वारा महज दो झोलाछाप डॉक्टरों को नोटिस जारी कर औपचारिकता पूरी कर ली गई, जबकि शेष अवैध क्लीनिकों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। क्षेत्र में जैसे ही स्वास्थ्य विभाग की टीम के आने की सूचना मिलती है, झोलाछाप डॉक्टर अपने क्लीनिक बंद कर गायब हो जाते हैं। निरीक्षण खत्म होते ही फिर से वही अवैध धंधा शुरू हो जाता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह सब अधिकारियों और झोलाछापों की मिलीभगत से संभव हो पा रहा है, जिसके चलते कार्रवाई पहले से तय और सीमित रह जाती है।सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इन झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा बिना जांच दवाइयां दी जाती हैं, मनमाने इंजेक्शन लगाए जाते हैं और गंभीर बीमारियों का गलत इलाज किया जाता है। इससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। बावजूद इसके जिम्मेदार विभाग की निष्क्रियता पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर रही है। बीते दिनों सामने आया था गंभीर मामलाकुंवरगांव कस्बे के गुरूनानक अस्पताल में बिना रजिस्ट्रेशन इलाज किए जाने और लापरवाही के चलते 13 वर्षीय बच्चे की मौत का मामला सामने आया था। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र विनावर के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नरेन्द्र पटेल ने अस्पताल का निरीक्षण कर रिपोर्ट थाना कुंवरगांव को भेजी थी। जांच में अस्पताल पूरी तरह अवैध, बिना लाइसेंस और अप्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा संचालित पाया गया। राजहंस वंशल की शिकायत पर मानवाधिकार आयोग ने भी मामले की जांच के निर्देश दिए थे। आरोप था कि 12 सितंबर 2025 को ग्राम हरनाथपुर निवासी निरंजन के पुत्र विक्रम की गलत उपचार के कारण मौत हुई। निरीक्षण में न तो अस्पताल का कोई पंजीकरण मिला और न ही संचालक के पास चिकित्सकीय योग्यता। साथ ही स्वच्छता और सुरक्षा मानकों का भी घोर अभाव पाया गया था। थाना प्रभारी राजेश कौशिक के अनुसार शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू की गई थी।

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