वाराणसी से सहायक ब्यूरो सलीम
वाराणसी में हजरत ख्वाजा नईम अहमद काबुली रहमतुल्लाह अलैह का उर्स मुबारक मनाया गया हिन्दुस्तान के सुल्तान उल हिंद हजरत ख्वाजा गरीब नवाज रहमतुल्ला के सातवें खलीफा
आपका वतन काबुल था। वहां से अजमेर शरीफ तशरीफ़ लाए और हज़रत सैयदना ख्वाजा गरीब नवाज मोइनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्ला अलेह की खिदमत में हाजिर हुए और उनकी सोहबत में फैज हासिल करते रहे। ६ सफर बुद्ध के दिन सन 556 हिजरी असर के वक्त सरकार गरीब नवाज रहमतुल्ला अलैह ने आपको खिलाफत आता फरमाई और बनारस रवाना किया। बनारस में आपने 41 साल जिंदगी बसर की पांच मोहर्रम सन 597 हिजरी को आप पर्दा फरमाया और बनारस के मोहल्ला ख्वाजा बाबा, काजी़ सादुल्लापुरा निकट बड़ी बाजार (अलवी पुरा) दफ्न हुए। आपका मजा़र बहुत बाफैज़ और अवाम के लिए जि़यारतगाह है। दूर-दूर से लोग आपकी मजार पर जि़यारत के लिए आते हैं। आप आवाम में ख्वाजा बाबा के नाम से मशहूर हैं। हर साल 7 मुहर्रम को आपका उर्स होता है, और 6 और 7 रजब को भी आपके पीर व मुर्शीद हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्ला अलैह के उर्स की मुनासबत से आपका उर्स होता है जिसमें बाद नमाज़ फजर कुरान खानी और दुआ होती है और बाद नमाज़ असर मजार शरीफ पर कुल और फातिहा का एहतमाम होता है और बाद नमाज़ ईशा आपके उर्स की मुनसीबत से एक महफिल नात और तकरीर की मुनअकिद की जाती है। आपके रौजे़ के बगल में एक आलीशान मस्जिद भी है जो आपके जमाने में आप ही के हाथ से तामीर की गई है, उस मस्जिद के तहखाना में एक चिल्लागाह भी है जिसमें आप इबादत फरमाया करते थे आज भी वह इबादत का महफूज है।
