सावित्रीबाई महिला शिक्षा की प्रथम प्रणेता थी,जयंती पर विश्वकर्मा महासभा ने किया नमन:अशोक विश्वकर्मा।

वाराणसी ।ऑल इंडिया यूनाइटेड विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक कुमार विश्वकर्मा ने महान महिला शिक्षा प्रणेता सावित्रीबाई फुले की जयंती पर उन्हें स्मरण और नमन करते हुए कहा है कि सावित्रीबाई ज्योतिराव फुले भारतीय समाजसुधारक और कवियित्री थी. अपने पति, ज्योतिराव फुले के साथ उन्होंने भारत में महिलाओ के अधिकारो को बढ़ाने में महत्वपूर्ण काम किये है. उन्होंने समाज के कड़े विरोध और अपमान को सहते हुए लड़कियों को शिक्षित करने का बीड़ा उठाया और 1948 में पुणे में देश की पहली महिला स्कूल की स्थापना करके भारत की पहली महिला शिक्षिका बनी। सावित्रीबाई फुले जातिभेद, रंगभेद और लिंगभेद के सख्त खिलाफ थी।
सावित्रीबाई शिक्षण सुधारक और समाज सुधारक महिला थी। उन्होंने बाल विवाह तथा विधवा स्त्रियों के बाल काटने की परंपरा के खिलाफ आवाज उठाई और संघर्ष किया। उन्होंने बाल विवाह सती प्रथा और छुआछूत जैसी कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाई, जिससे उन्हें नारी मुक्ति आंदोलन की जननी कहा जाता है।महिलाओं पर होने वाले अत्याचार के खिलाफ सामाजिक सुरक्षा के लिए उन्होंने अनेक आंदोलन और संघर्ष किया। सावित्रीबाई फुले का शिक्षा और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ किया गया संघर्ष और योगदान सदैव याद किया जाएगा।

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