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गोंडा JE ने बचने के लिए रचा नया षड्यंत्र— क्या JE बच निकलेगा, या पीड़ित को मिलेगा न्याय?

अलीगढ के गोण्डा बिजली विभाग फिर सुर्खियों में है वजह विकाश नहीं. बल्कि घोर लापरवाही और सिस्टम में पनपति मिलीभगत

बात करते है एक तारा तो , दूसरा है बड़ा सितारा— कुलदीप और JE हरदेश, सिस्टम के संरक्षित दो चेहरे

जानिए गोण्डा बिजली विभाग में इन दिनों दो नाम चर्चा में हैं एक तारा, तो दूसरा है सितारा।
जी हाँ तारा हैं कुलदीप— जिनके खिलाफ पहले भी एक हादसे में आम व्यक्ति की जान जाने का मामला सामने आया था, और आज भी वही बिजली विभाग में कार्य करते नजर आरहे हैं,वो भी बिना किसी कार्रवाई के।
वहीं दूसरा है सितारा हैं JE हरदेश— जिनकी ताज़ा लापरवाही ने प्राइवेट लाइनमैन गरीब नीतू की जान ले ली।
मामला 25 दिसंबर का है गोण्डा–अलीगढ़ मार्ग पर 33 हजार हाई-वोल्टेज लाइन पर काम चल रहा था। ठेकेदार के फोन पर JE हरदेश ने शटडाउन दिया — शटडाउन तो दिया लेकिन गलत लाइन का।

सूत्रों के मुताबिक, JE साहब रोज़ शराब का सेवन करते हैं। क्या पता नशे की वजह से ही गलत फीडर पर शटडाउन दिया गया हो।

सबसे गंभीर बात यह कि— नियम स्पष्ट है—
JE को खुद यह जांचना होता है कि काम किस लाइन पर चल रहा है, और उसी लाइन का शटडाउन देना अनिवार्य है। बिना भौतिक निरीक्षण और पुष्टि के काम शुरू नहीं किया जा सकता।

लेकिन यहाँ नियम सिर्फ और सिर्फ किताबों में थे—
वहीं गलत लाइन का शटडाउन देकर आदेश दे दिया गया कि लाइन बंद है आप काम करिये
जबकि जिस लाइन को बंद करना था, पूर्ण रूप से वह लाइन चालू थी!

नीतू जैसे ही आदेश पाकर खंभे पर चढ़ा,33KV की करंट ने एक ही झटके में उनकी जिंदगी के साथ खिलवाड़ ली। वहीं 9 दिन चले अस्पताल में उपचार के दौरान मौत से लड़ने के बाद उन्होंने आखिर कार अपनी गरीवी से भरी जिंदगी कुर्वान कर दी.. अब क्या था कुछ नहीं गरीब नीतू के पीछे हैं 4 छोटे बड़े बच्चे, जिनके सिर से पहले ही माँ का साया उठ भी चुका है, और अब वह सिर्फ और सिर्फ जी रहे है तो न्याय की उम्मीद में!

लेकिन सिस्टम पर जनता का शक यूँ ही नहीं गहरा रहा है ,आशंका यह भी तेज़ है हो रही है कि
JE हरदेश व ठेकेदार कमरुदीन कहीं मौके पर मौजूद लाइनमैनों से लिखित बयान लेकर यह साबित न कर दें कि आदेश सही था
और फाइलों में खेल.खेल कर JE फिर से बेफिक्र होकर अपनी कुर्सी संभाल लें!

क्योंकि जिस विभाग में पहले भी एक आम व्यक्ति की मौत के बाद भी सख्त कार्रवाई नहीं हो सकी हो
तो साथियो यह तो JE हैं कुर्सी, सिस्टम और फाइलों के संरक्षित सितारे

लेकिन अब सवाल इस बात का है कि क्या इस विभाग में जान की कीमत है, या सिर्फ जुगाड़ और फाइलों की सेटिंग की?

क्या बिजली विभाग में मौत अब एक आम घटना बन चुकी है?

और जब गलती करने वाले ही आज भी उसी कुर्सी और विभाग में बैठे हों,
तो क्या कार्रवाई की उम्मीद की जायगी या कहानी बदलकर फाइलें बंद कर दी जाएगी?

अब देखना यह होगा कि—
सिस्टम संरक्षित सितारों को बचाएगा?
या 4 मासूम बच्चों की न्याय की आवाज़ सुनी जाएगी?

क्या अब JE हरदेश भी कुलदीप लाइनमैन की तरह, एक और जान जाने के बाद भी बिना किसी कार्रवाई के, बिजली विभाग में बेफिक्र और सुरक्षित कार्य करते हुए नजर आएंगे या होंगी कार्यवाही

Aligarh
Gonda
ElectricityDepartment

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