बाराबंकी में एक 20 वर्षीय युवक की संदिग्ध मौत का मामला अब गंभीर मोड़ लेता नज़र आ रहा है। मृतक के पिता ने इसे आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या अथवा हत्या के लिए मजबूर किए जाने का मामला बताते हुए साक्ष्य से छेड़छाड़ का आरोप लगाया है। न्यायालय के आदेश पर नगर कोतवाली पुलिस ने शासकीय अधिवक्ता समेत तीन आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार रमेश चन्द्र वर्मा, पुत्र स्व0 रामशंकर वर्मा, मूल निवासी ग्राम मुरारपुर रेलवे स्टेशन, थाना राम सनेही घाट, वर्तमान में विशेष लोक अभियोजन अधिकारी (गैंगस्टर एक्ट विशेष न्यायालय, बाराबंकी) के पद पर कार्यरत हैं। वह अपनी पत्नी किरन वर्मा और 20 वर्षीय पुत्र अनन्य वर्मा के साथ आवास विकास कॉलोनी स्थित पूरे मोती मोहल्ले में किराए के मकान में रह रहे थे
रमेश चन्द्र वर्मा ने बताया कि उनका पुत्र अनन्य वर्मा लखनऊ विश्वविद्यालय से बीकॉम की पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी व ओ-लेवल कंप्यूटर कोर्स कर रहा था। उनकी पत्नी प्रतिदिन सुबह ट्रेन से गांव चली जाती थी और शाम को वापस आती थी 1दिसंबर 2025 को शाम करीब 4 बजे जब रमेश चन्द्र वर्मा कचहरी से घर लौटे तो घर का जालीदार गेट अंदर से बंद था और बिजली भी नहीं थी पुत्र अनन्य को आवाज लगाने पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसी दौरान आंगन में छत के लोहे के जाल से साड़ी के सहारे अनन्य वर्मा को फंदे से लटका हुआ देखा गया
सूचना पर पहुंची पुलिस व फॉरेंसिक टीम ने जांच के बाद शव को नीचे उतारा, लेकिन तब तक अनन्य की मौत हो चुकी थी मृतक की जेब से रियलमी मोबाइल फोन (दो सिम सहित) बरामद कर फॉरेंसिक टीम ने कब्जे में लिया और शव को सील कर आवश्यक कार्रवाई की गई।
मामले में नया मोड़ तब आया जब 4 दिसंबर 2025 को शासकीय अधिवक्ता अरविन्द राजपूत ने रमेश वर्मा को फोन कर बताया कि विवेचक मोबाइल फोन को लखनऊ फॉरेंसिक लैब में डाटा रिकवरी के लिए ले जाएंगे और मृतक का लैपटॉप भी जांच के लिए चाहिए। विश्वास में आकर रमेश वर्मा ने अपनी पत्नी के माध्यम से लैपटॉप कचहरी के मुख्य गेट पर अरविन्द राजपूत को सौंप दियाइसके बाद पूछताछ करने पर अरविन्द राजपूत द्वारा अलग-अलग जानकारी दी गई संदेह होने पर वरिष्ठ अधिवक्ताओं से जानकारी कराई गई, जिससे पता चला कि लैपटाप की जांच कचहरी परिसर स्थित रेस्टोरेंट ‘दरबार-ए-कचहरी’ में हो रही थी, जहां कोई पुलिस अधिकारी मौजूद नहीं था। इस पर अधिवक्ता साथियों ने लैपटॉप अपने कब्जे में लेकर रमेश वर्मा को सौंप दियासुसाइड नहीं, मर्डर का संदेह
रमेश वर्मा का आरोप है कि धोखे से लैपटॉप लेकर उसके डाटा के साथ छेड़छाड़ कर साक्ष्य मिटाने का प्रयास किया गया। पूछताछ में लैपटॉप एक्सपर्ट का नाम आमिर बताया गया। इन परिस्थितियों में उन्हें पूर्ण विश्वास है कि उनके पुत्र ने आत्महत्या नहीं की, बल्कि उसकी हत्या की गई है या उसे ऐसा करने के लिए मजबूर किया गया है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मृतक के मोबाइल और लैपटॉप में मौजूद व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम, फेसबुक, गूगल ड्राइव जैसे डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के डाटा को मिटाकर असली दोषियों को बचाने की कोशिश की गई।

कोर्ट के आदेश पर FIR

रमेश चन्द्र वर्मा ने 19 दिसंबर 2025 को नगर कोतवाली प्रभारी को प्रार्थना पत्र दिया और 20 दिसंबर 2025 को उच्चाधिकारियों को भी सूचना दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। हताश होकर उन्होंने बीएनएस की धारा 173(5) के तहत सीजेएम बाराबंकी (कोर्ट नंबर 18) में प्रार्थना पत्र दिया।कोर्ट के आदेश पर नगर कोतवाली पुलिस ने शासकीय अधिवक्ता अरविन्द राजपूत, आमिर और उनके अज्ञात सहयोगियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 103(1) और 238 के तहत मुकदमा दर्ज लिया है नगर कोतवाल सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि न्यायालय के आदेश पर मुकदमा दर्ज कर मामले की छानबीन की जा रही है।
वॉइस ब्यूरो चीफ रामानंद सागर

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