बाराबंकी:सरकारी अस्पतालों में आउटसोर्सिंग पद पर तैनात सुरक्षा कर्मियों को हटाने के आदेश के बाद जनपद में हड़कंप मच गया है। इस आदेश से जिला अस्पताल एवं महिला अस्पताल में तैनात सुरक्षा कर्मियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। सुरक्षा कर्मियों का कहना है कि बिना किसी पूर्व सूचना के उन्हें सेवा से हटाया जा रहा है, जिससे उनके सामने रोज़ी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
बताया जा रहा है कि बाराबंकी के जिला सरकारी अस्पताल एवं महिला अस्पताल में वर्ष फरवरी 2024 में आईटी वर्ल्ड प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के माध्यम से आउटसोर्सिंग पर सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई थी। अब अचानक उन्हें हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जबकि कई कर्मी लंबे समय से अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे हैं।


सुरक्षा कर्मियों का आरोप है कि आउटसोर्सिंग के नियमों के अनुसार यह नियुक्तियां रिटायर्ड सैनिकों के लिए निर्धारित होती हैं, लेकिन रिटायर्ड सैनिक इस कार्य में रुचि नहीं लेते। ऐसे में निजी कंपनियां सरकार से ठेका लेकर मनमाने तरीके से सामान्य नागरिकों से काम करवाती हैं और आर्थिक शोषण किया जाता है।
कर्मचारियों के अनुसार कंपनी द्वारा ₹12,000 वेतन दर्शाया जाता है, जबकि वास्तविक रूप से मात्र ₹9,000 ही दिए जाते हैं। शेष ₹3,000 पीएफ के नाम पर काटे जाते हैं, जिसका भुगतान समय पर नहीं किया जाता। इतना ही नहीं, महिला अस्पताल में तैनात कई सुरक्षा कर्मियों को पिछले तीन महीनों से वेतन भी नहीं मिला है।
जैसे ही हटाए जाने की सूचना मिली, सभी आउटसोर्स सुरक्षा कर्मी आनन-फानन में जिला अस्पताल परिसर में एकत्र हो गए और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) अवधेश कुमार यादव को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से कर्मचारियों ने मांग की कि उन्हें पुनः सेवा में रखा जाए और वेतन संबंधी समस्याओं का शीघ्र समाधान किया जाए।


सुरक्षा कर्मियों ने कहा कि वे पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं। इसके बावजूद बिना किसी नोटिस के हटाया जाना पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है। उन्होंने प्रशासन से मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए आदेश पर पुनर्विचार करने की मांग की।
वहीं, सीएमओ अवधेश कुमार यादव ने ज्ञापन प्राप्त करते हुए उचित कार्रवाई एवं मामले को उच्चाधिकारियों तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। हालांकि जब उनसे यह पूछा गया कि आउटसोर्सिंग का नया ठेका किस कंपनी को दिया जा रहा है, तो उन्होंने इस विषय पर कोई स्पष्ट जानकारी देने से परहेज किया, जिससे कर्मचारियों में और असंतोष देखने को मिला।
कर्मचारियों का आरोप है कि आउटसोर्सिंग के नाम पर पारदर्शिता नहीं बरती जाती और ठेका प्रक्रिया में धांधली होती है। बाद में अपने खास लोगों को नौकरी देने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं।
इस मामले में प्रभावित सुरक्षा कर्मियों में संजीव कुमार, जितेंद्र कुमार, अब्दुल बारी, उमेश, प्रदीप कुमार, मोनू, विपिन यादव, अमित कुमार और चंद्र प्रकाश शामिल हैं।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर मामले पर क्या कदम उठाता है और वर्षों से सेवा दे रहे सुरक्षा कर्मियों को न्याय मिल पाता है या नहीं।

मण्डल ब्यूरो चीफ अयोध्या
तेज बहादुर शर्मा।

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