बाराबंकी ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के शोक में यूपी के बाराबंकी जिले के किंतूर गांव में ईद की खुशियां नहीं मनाई। यहां शिया समुदाय ने सादगी से दिन गुजारा। ईरान के पहले सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह रुहोल्लाह मुसावी खुमैनी के पूर्वजों के इसी गांव से जुड़े होने की वजह से यहां के लोग भावनात्मक रूप से रिश्ता निभा रहे हैं। गांव के निवासी सैय्यद आदिल ने बताया कि शरिया के अनुसार नमाज अदा की गई, लेकिन ईद का सेलिब्रेशन नहीं किया गया।28 फरवरी 2026 में इजरायल और अमेरिका हमले में ईरान के शीर्ष नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु की खबरों के बाद किंतूर गांव में गहरा शोक देखा गया था। शनिवार को ईद पर गांव और आसपास के लोगों ने एक-दूसरे के घर जाकर बधाई देने की बजाय शोक व्यक्त किया।गांव में गम का माहौल बना हुआ है। आसपास के गांवों बरौलिया, बदोसरायं स्थित कई इलाकों में शिया समुदाय से जुड़े मुसलमानों ने ईद नहीं मनाई है। उन्होंने खाड़ी देशों के युद्ध पर विराम लगाने की अपील के साथ देश में अमन और शांति की दुआ की है।खुमैनी के दादा बाराबंकी से गए थे ईरान
बताया जाता है कि सैयद अहमद मूसवी बाराबंकी के रहने वाले थे। उनका जन्म सिरौलीगौसपुर तहसील के किंतूर गांव में हुआ था। वर्ष 1830 में 40 साल की उम्र में वह पहली बार धार्मिक यात्रा पर इराक गए। वहां से ईरान पहुंचे और वहीं के एक गांव खुमैन में बस गए। अहमद मूसवी ने अपने नाम के आगे उपनाम ‘हिंदी’ जोड़ा। लोग उन्हें सैयद अहमद मूसवी हिंदी के नाम से पुकारने लगे। मुसवी के पोते रूहुल्लाह खुमैनी का जन्म 1902 में हुआ। 1979 में पहली बार ईरान में इस्लामी सरकार बनी तो खुमैनी ईरान के पहले सुप्रीम लीडर बने। 1989 में जब खुमैनी का निधन हुआ तो अयातुल्ला खामेनेई ने उनकी जगह ली थी।न सेवइयों की खुशबू, न बच्चों की चहल-पहल
अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन की खबर से गांव के लोग गहरे शोक में हैं। इसी वजह से यहां के लोगों ने इस बार ईद का त्योहार न मनाने का फैसला लिया है। मस्जिदों में नमाज के लिए सीमित लोग ही पहुंचे। गांव में न तो सेवइयों की खुशबू, न ही बच्चों की चहल-पहल दिखी। अधिकतर घरों में सादगी और खामोशी का माहौल रहा। स्थानीय निवासी ने बताया कि आज का दिन खुशी का होता है, लेकिन किन्तूर का धार्मिक जुड़ाव अयातुल्ला अली खामेनेई से रहा है। उनके निधन की खबर ने पूरे गांव को शोक में डाल दिया है। इसलिए हमने त्योहार को हर्षोल्लास से नहीं मनाया।

