जनपद बाराबंकी के जिला अस्पताल के योग्य एमबीबीएस एमडी वरिष्ठ फिजीशियन डॉ राजेश कुमार कुशवाहा के द्वारा मरीज को लिखा गया दवाई का पर्चा चर्चा का विषय बना हुआ है इतनी ज्यादा पढ़ाई लिखाई करने के बाद भी डॉक्टर लोग लिखावट को सही नहीं लिखते हैं।

बाराबंकी जिला अस्पताल का एक पर्चा क्या वायरल हुआ, पूरा इंटरनेट डॉक्टरी लिपि का शोध करने निकल पड़ा खैर मामला भी ऐसा ही है, मरीज बेचारा दवा लेने गया था, लेकिन पर्चा देखकर ऐसा लगा जैसे किसी प्राचीन गुफा की दीवार से कोड उठा लाया हो ऊपर से तारीख 9 अप्रैल… मतलब ताज़ा-ताज़ा कन्फ्यूजन अब सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं ये दवा है या गुप्त संदेश “डॉक्टर साहब ने लिखा है या ECG मशीन ने साइन कर दिया।कुछ एक्सपर्ट तो इसे नई भाषा घोषित करने पर उतारू है, मेडिकल संस्कृत-उर्दू-हायरोglyphics मिक्स एडिशन’,अब जनता सीधे डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक तक पहुंच गई है सर, इलाज बाद में, पहले ये बताइए पढ़ें कैसे किसी ने तो ये भी सलाह दे डाली दवा के साथ एक ट्रांसलेटर भी दे दीजिए, वरना मरीज ठीक हो न हो गूगल जरूर बीमार हो जाएगा।कुल मिलाकर हालत ये है कि बीमारी से ज्यादा सिर दर्द अब पर्चे की लिखावट दे रही है और मरीज सोच रहा है डॉक्टर ने दवा दी है या पहेली वैसे भी साइकोलॉजिकल इफेक्ट यह भी है कि जब दूसरे चीज में उलझ जाओगे तो बीमारी खुद ही दूर भाग जाएगी, कमाल भाषा का नहीं कमाल यह है जिसने दवा दी होगी। वैसे मै कन्फर्म कर दूं इसमें पैरासिटामोल लिखी है।

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