लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार प्राकृतिक खेती, जैविक कृषि, गौसंवर्धन एवं किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में लगातार ठोस और दूरदर्शी कदम उठा रही है। इसी क्रम में प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही तथा पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह ने बुधवार को विधान भवन, लखनऊ स्थित समिति कक्ष-8 में गोबर खाद के प्रयोग, सी०बी०जी० (कंप्रेस्ड बायोगैस) प्लांटों के संचालन तथा एफ०ओ०एम० (फर्मेंटेड ऑर्गेनिक मैन्योर) उत्पादन की वर्तमान स्थिति तथा भविष्य की बेहतर रणनीति के लिए एक संयुक्त विभागीय बैठक की।

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार खेती को केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उसे टिकाऊ, पर्यावरण अनुकूल एवं आर्थिक रूप से लाभकारी बनाना चाहती है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती और जैविक उत्पादों के माध्यम से मिट्टी की सेहत सुधारना समय की आवश्यकता है और प्रदेश सरकार इस दिशा में गंभीरता से कार्य कर रही है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिन तकनीकों एवं मॉडलों में व्यवहारिकता और किसानों के हित की संभावना दिखाई दे रही है, उन्हें प्रदेश के विभिन्न कृषि जलवायु क्षेत्रों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू कर परीक्षण कराया जाए, ताकि वैज्ञानिक आधार पर उनकी उपयोगिता का मूल्यांकन किया जा सके।

बैठक में पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि गौशालाओं को केवल संरक्षण केंद्र नहीं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और प्राकृतिक कृषि के सशक्त केंद्र के रूप में विकसित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि गोबर एवं गोमूत्र के वैज्ञानिक उपयोग से गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है तथा किसानों को कम लागत वाली खेती का विकल्प उपलब्ध कराया जा सकता है।

बैठक में गौ-आधारित जैविक खेती, गोबर एवं गोमूत्र आधारित उत्पादों, बायोचार, लिक्विड ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर, बायोगैस एवं सीबीजी प्लांटों की कार्यप्रणाली तथा प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के विभिन्न नवाचारों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। विभिन्न संस्थाओं एवं विशेषज्ञों द्वारा ऐसे मॉडल प्रस्तुत किए गए जिनके माध्यम से गोबर एवं गोमूत्र का वैज्ञानिक उपयोग कर मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार, कार्बन कंटेंट में वृद्धि, रासायनिक उर्वरकों की खपत में कमी तथा किसानों की लागत घटाने की संभावनाएं व्यक्त की गईं। कई प्रस्तुतियों में यह भी बताया गया कि जैविक खाद एवं लिक्विड फर्टिलाइजर के उपयोग से मिट्टी में कार्बन स्तर को क्रमिक रूप से बढ़ाया जा सकता है। विशेषज्ञों ने किसानों को रासायनिक खेती से प्राकृतिक खेती की ओर प्रेरित करने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाने पर भी बल दिया।

बैठक के दौरान सुझाव दिया कि गांव स्तर पर छोटे एवं मध्यम आकार के बायोगैस एवं सीबीजी प्लांट स्थापित कर ऊर्जा उत्पादन के साथ-साथ जैविक खाद का उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। इससे एक ओर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा, वहीं दूसरी ओर खेतों की उर्वरता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

बैठक में गौशालाओं में हरित चारे की उपलब्धता, गोबर आधारित ऊर्जा उत्पादन, जैविक खाद के विपणन, किसानों के प्रशिक्षण तथा वैज्ञानिक परीक्षणों को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि यदि इन मॉडलों को व्यवस्थित रूप से लागू किया जाए तो इससे किसानों की आय बढ़ाने, लागत घटाने तथा पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान मिल सकता है।

बैठक में उत्तर प्रदेश गौसेवा आयोग के अध्यक्ष श्री श्याम बिहारी गुप्ता, प्रमुख सचिव कृषि
रवींद्र, सचिव कृषि इन्द्र विक्रम सिंह, विशेष सचिव पशुधन देवेंद्र पांडेय, निदेशक कृषि पंकज त्रिपाठी, निदेशक पशुपालन डॉ. मेमपाल सिंह, अपर निदेशक कृषि रक्षा आशुतोष मिश्र, संयुक्त निदेशक पशुपालन पी.के. सिंह, एफ०ओ०एम० उत्पादक संस्थाओं के प्रतिनिधि एवं अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

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