धर्मेन्द्र कसौधन/ब्यूरो
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राज्य के सरकारी वकीलों को एक बड़ी सौगात दी है। सरकार ने राज्य विधि अधिकारियों को दी जाने वाली मंथली रिटेनरशिप और प्रतिदिन की बहस फीस के रेट में संशोधन करते हुए इसे काफी बढ़ा दिया है। सरकार के इस फैसले से जिला शासकीय अधिवक्ताओं से लेकर महाधिवक्ता तक के मानदेय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
महाधिवक्ता और मुख्य स्थायी अधिवक्ता की फीस में वृद्धि
महाधिवक्ता: महाधिवक्ता की प्रतिमाह रिटेनरशिप को 75 हजार रुपये से बढ़ाकर 1.25 लाख रुपये कर दिया गया है। इसके साथ ही उनकी बहस फीस भी 40 हजार रुपये से बढ़ाकर 60 हजार रुपये कर दी गई है।
मुख्य स्थायी अधिवक्ता: मुख्य स्थायी अधिवक्ता की रिटेनरशिप 22 हजार से बढ़ाकर 35 हजार रुपये की गई है, जबकि बहस फीस को 12 हजार रुपये तय किया गया है।

जिला स्तर के अधिवक्ताओं के मानदेय में हुआ यह बदलाव
जिला शासकीय अधिवक्ता: इनकी रिटेनरशिप नौ हजार रुपये से बढ़ाकर 14 हजार रुपये कर दी गई है। वहीं, प्रतिदिन कार्यदिवस की फीस को 1650 रुपये से बढ़ाकर 2500 रुपये किया गया है।
अपर जिला शासकीय अधिवक्ता: इनकी रिटेनरशिप 7200 रुपये की जगह अब 11 हजार रुपये होगी। बहस फीस को भी 1500 रुपये से बढ़ाकर 2300 रुपये कर दिया गया है।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता: इन्हें अब 6300 रुपये की जगह 10 हजार रुपये रिटेनरशिप मिलेगी। इसके अलावा बहस फीस को 1500 रुपये से बढ़ाकर 2300 रुपये किया गया है।
उप जिला शासकीय अधिवक्ता: इनकी रिटेनरशिप को 5400 रुपये से बढ़ाकर नौ हजार रुपये कर दिया गया है, जबकि प्रतिदिन की फीस 1275 रुपये की जगह अब 2000 रुपये मिलेगी।
अन्य अधिवक्ताओं के लिए नई दरें
नामिका वकील, विशेष अधिवक्ता और न्याय मित्र (दीवानी-फौजदारी): इन सभी को अब प्रतिदिन 1500 रुपये की जगह 2300 रुपये प्रति कार्यदिवस दिए जाएंगे।
योगी सरकार के इस कदम से राज्य के विधि अधिकारियों और सरकारी वकीलों में खुशी की लहर है, क्योंकि लंबे समय बाद उनके मानदेय और प्रतिदिन के भत्तों में इस तरह का बड़ा और सकारात्मक बदलाव किया गया है।
