प्रयागराज, 10 जून: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शांति भंग के मामलों में पुलिस की मनमानी पर कड़ा रुख अपनाते हुए ऐतिहासिक आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि यदि CrPC की धारा 151 के तहत किसी निर्दोष व्यक्ति को जेल भेजा जाता है तो जिम्मेदार पुलिस अफसर के वेतन से प्रतिदिन 25 हजार रुपये की वसूली की जाएगी।
न्यायमूर्ति की एकल पीठ ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि शांति भंग की आशंका में गिरफ्तारी के प्रावधान का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हो रहा है। निजी रंजिश, जमीनी विवाद और बिना ठोस आधार के लोगों को जेल भेज दिया जाता है, जिससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा और आजीविका पर असर पड़ता है।

क्या है आदेश:
- निर्दोष पाए जाने पर पीड़ित जितने दिन जेल में रहा, उतने दिन के लिए जिम्मेदार अफसर के वेतन से 25 हजार रुपये प्रतिदिन की दर से कटौती होगी।
- यह राशि पीड़ित को मुआवजे के रूप में दी जाएगी।
- आदेश का पालन न करने पर अवमानना की कार्रवाई होगी।
कोर्ट ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को आदेश की प्रति भेजकर अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा है। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि पुलिस राज की इजाजत नहीं दी जा सकती। नागरिकों की स्वतंत्रता सर्वोपरि है।
इस आदेश के बाद पुलिस-प्रशासन में हड़कंप की स्थिति है। विधि विशेषज्ञों ने इसे आम आदमी के लिए बड़ी राहत बताया है।
