धर्मेन्द्र कसौधन/एमडी ब्यूरो
महाराजगंज। उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (UPSDMA), लखनऊ के निर्देशन में आज जनपद महाराजगंज में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में ‘बाढ़ मॉक ड्रिल-2026’ का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस राष्ट्रव्यापी अभ्यास का मुख्य उद्देश्य बाढ़ जैसी गंभीर आपदा के समय विभिन्न सरकारी विभागों की तत्परता, आपसी समन्वय, खोज एवं बचाव कार्यों तथा राहत व्यवस्था की प्रभावशीलता का बारीकी से परीक्षण करना था।
आपदा प्रबंधन को सुदृढ़ करने के लिए जनपद की चारों तहसीलों में अलग-अलग काल्पनिक परिदृश्यों (Scenarios) के आधार पर बड़े स्तर पर अभ्यास किया गया।
तहसीलों में आयोजित प्रमुख गतिविधियां और परिदृश्य
तहसील सदर (ग्राम पंचायत डोमरा): यहाँ गाँवों के चारों ओर से बाढ़ के पानी से घिरने (Marooning) का परिदृश्य तैयार किया गया। इसके तहत बाढ़ में फंसे ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने, राहत सामग्री के वितरण और प्रभावितों के पुनर्वास की पूरी प्रक्रिया का जीवंत प्रदर्शन हुआ।

तहसील फरेंदा (जयपुरिया कॉलेज): इस स्थल पर राहत शिविर, बाढ़ चौकी तथा फील्ड अस्पताल की स्थापना की गई। मॉक ड्रिल के दौरान शिविरों के सुचारू संचालन, घायलों व बीमारों को चिकित्सा सहायता, भोजन, स्वच्छ पेयजल और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को सुनिश्चित करने का अभ्यास किया गया।
तहसील निचलौल (ग्राम गेरहवन): यहाँ पानी में नाव पलटने (Boat Capsizing) की गंभीर स्थिति का परिदृश्य बनाया गया। इसके अंतर्गत गहरे पानी में खोज एवं बचाव कार्य (Search and Rescue), डूबते लोगों को बाहर निकालना और उन्हें तत्काल प्राथमिक उपचार व आपातकालीन चिकित्सा सहायता देने की त्वरित कार्रवाई परखी गई।
तहसील नौतनवा (तहसील परिसर): इस क्षेत्र में बाढ़ के कारण बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के ध्वस्त होने की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य का प्रदर्शन किया गया। आपदा क्षेत्र में फंसे नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयासों को परखा गया।
’इंसीडेंट रिस्पांस सिस्टम’ के तहत हुई कार्रवाई
मॉक ड्रिल की शुरुआत होते ही जिला आपदा परिचालन केंद्र (DEOC) को तुरंत सक्रिय कर दिया गया। पूरी कार्रवाई को Incident Response System (IRS) के मानकों के अनुरूप संचालित किया गया। इसमें 11वीं वाहिनी एनडीआरएफ (गोरखपुर), पीएसी फ्लड टीम, पुलिस, स्वास्थ्य, राजस्व और अग्निशमन विभाग के जवानों व अधिकारियों ने संयुक्त रूप से मोर्चा संभाला और बेहतरीन आपदा प्रतिक्रिया का प्रदर्शन किया।
जिलाधिकारी ने स्वयं सभी तहसील क्षेत्रों की व्यवस्थाओं और गतिविधियों का स्थलीय अवलोकन किया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। समीक्षा के दौरान पाया गया कि सभी चारों परिदृश्यों में प्रभावित व्यक्तियों को पूरी तरह सुरक्षित और समय रहते रेस्क्यू किया गया।
शासन स्तर पर सराहना
मॉक ड्रिल के समापन के बाद शासन स्तर पर एक उच्च स्तरीय ब्रीफिंग सत्र का आयोजन हुआ। इसमें जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA), महाराजगंज द्वारा जनपद में किए गए सभी अभ्यासों का एक विस्तृत प्रस्तुतीकरण (Presentation) दिया गया। इस दौरान रिसोर्स मैनेजमेंट और रिस्पांस टाइम की सराहना करते हुए शासन ने माना कि महाराजगंज में यह मॉक ड्रिल बिना किसी व्यवधान या चुनौती के, पूरी तरह सुव्यवस्थित और प्रभावी ढंग से संपन्न हुई।
”इस प्रकार के अभ्यास वास्तविक आपदा के समय त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने में मील का पत्थर साबित होते हैं।”
— जिलाधिकारी, महाराजगंज
कार्यक्रम के समापन अवसर पर जिलाधिकारी ने एनडीआरएफ, पीएसी, पुलिस, स्वास्थ्य, राजस्व और फायर ब्रिगेड सहित सभी सहभागी एजेंसियों और विभागों की पीठ थपथपाई। उन्होंने सभी के समन्वित प्रयासों की सराहना करते हुए ‘बाढ़ मॉक ड्रिल-2026’ के सफल समापन की घोषणा की।
