एमडी न्यूज़/सुशील कुमार रामपुर कला सीतापुर

सीतापुर के पहला विकासखंड अंतर्गत मंझिया ग्राम पंचायत में मनरेगा योजना अब रोजगार कम और सवाल ज्यादा पैदा करती दिखाई दे रही है। जिस योजना का मकसद गरीब मजदूरों के हाथों को काम देना था, वहीं अब ग्रामीणों के आरोपों के बीच सरकारी धन की बंदरबांट का अड्डा बनती नजर आ रही है। कागज़ों में 60 मजदूर खारजा खुदाई और सफाई कार्य में लगे बताए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी तस्वीर कुछ और कहानी कह रही है। सवाल उठ रहा है कि आखिर ये मजदूर फावड़ा चला रहे थे या सिर्फ कागजों में “हाजिरी का खेल” खेला जा रहा था?
ग्रामीणों का आरोप है कि मास्टर रोल में ऐसे नाम दर्ज हैं जो मौके पर दिखाई तक नहीं दिए।

कई नामों के आगे फोटो तक गायब बताए जा रहे हैं। यदि यह सच है, तो मामला सिर्फ अनियमितता नहीं बल्कि सरकारी धन पर सुनियोजित डाका माना जाएगा। मजदूरों के नाम पर भुगतान, लेकिन काम न के बराबर—यह आखिर किसकी मेहरबानी से संभव हो रहा है?
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जब ग्राम पंचायत सचिव से जानकारी लेने की कोशिश की गई, तो स्पष्ट जवाब देने के बजाय गोलमोल बातें कर मामला टालने की कोशिश की गई। सवाल यह है कि यदि सब कुछ नियमों के अनुसार हुआ है, तो जवाब देने में हिचक क्यों? क्या रिकॉर्ड में कुछ ऐसा है जिसे सामने आने से रोका जा रहा है?


कई अखबारों में खबर प्रकाशित होने के बाद आनन-फानन में काम शुरू कराया गया, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि काम अब भी मानक के अनुसार नहीं हो रहा। यानी पहले कागज़ों में विकास दौड़ा, अब ज़मीन पर खानापूर्ति! ऐसे में यह चर्चा तेज है कि कहीं जांच भी सिर्फ “औपचारिकता” बनकर फाइलों में दफन न हो जाए। कड़वे सवाल जो गांव पूछ रहा है: 60 मजदूर अगर लगे थे तो कार्यस्थल पर भीड़ क्यों नहीं दिखी मास्टर रोल में फोटो गायब क्या फर्जी हाजिरी का बड़ा खेल। शिकायत के बाद ही काम क्यों शुरू हुआ.. पहले पैसा,बाद में काम। सचिव जवाब देने से बचते क्यों रहे—क्या मामला गले की हड्डी बन गया। गरीबों के रोजगार की योजना में आखिर किसकी जेब भर रही है। अब देखना यह है कि प्रशासन “जांच” करेगा या सिर्फ कागज़ों पर खानापूर्ति कर भ्रष्टाचार की मिट्टी डाल देगा।

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