
हाथरस जनपद में रजिस्ट्री कार्यालयों में पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल के माध्यम से रजिस्ट्री कराने की व्यवस्था लागू किए जाने के विरोध में रेवेन्यू बार एसोसिएशन और दस्तावेज लेखक संघ ने केंद्र और प्रदेश सरकार को शिकायत पत्र भेजा है। इस मामले को लेकर प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, मुख्यमंत्री और प्रमुख सचिव को संबोधित ज्ञापन में गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। जिसको लेकर तहसील परिसर में उनका धरना प्रदर्शन छठवें दिन भी जारी है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि हाथरस, सादाबाद और सिकंदराराऊ तहसीलों में वर्षों से रजिस्ट्री एवं निबंधन का कार्य सुचारू रूप से और पारदर्शिता के साथ संचालित होता आ रहा है। लेकिन उत्तर प्रदेश शासन द्वारा जारी एक आदेश के बाद रजिस्ट्री कार्यालयों में पीपीपी मॉडल के तहत एक निजी एजेंसी के माध्यम से रजिस्ट्रेशन कराने का दबाव बनाया जा रहा है।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि इस व्यवस्था से आम जनता को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही रजिस्ट्री प्रक्रिया में निजी एजेंसी की भागीदारी से पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं। शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि जिस कंपनी को इस कार्य के लिए नामित किया गया है, उसके प्रतिनिधियों को रजिस्ट्री और स्टांप विभाग का पर्याप्त अनुभव नहीं है।
रेवेन्यू बार एसोसिएशन और दस्तावेज लेखक संघ का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में किसी प्रकार की समस्या नहीं है, इसलिए निजी एजेंसी को शामिल करने का निर्णय जनहित में नहीं है। उन्होंने शासन से मांग की है कि पीपीपी मॉडल के माध्यम से रजिस्ट्री कराने की प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रोका जाए और इस संबंध में जारी आदेशों की समीक्षा की जाए।
फिलहाल यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और संबंधित संगठनों ने सरकार से हस्तक्षेप कर जनता के हित में उचित निर्णय लेने की मांग की है।
बाईट — मदन मोहन गौड़ — अधिवक्ता
रिपोर्टर राजा पाठक
