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रोहित जैन दभेड़ी वाले
जिला सहायक ब्यूरो प्रमुख, मुजफ्फरनगर

झांसी, उत्तर प्रदेश

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर झांसी में आयोजित भव्य सामूहिक योगाभ्यास कार्यक्रम ने पूरे शहर को योगमय बना दिया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, सामाजिक संगठनों, विद्यार्थियों एवं हजारों नागरिकों ने बढ़-चढ़कर सहभागिता करते हुए योग के प्रति अपनी आस्था और जागरूकता का परिचय दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार एवं योग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए की गई। इस अवसर पर “न तस्य रोगो न जरा न मृत्युः प्राप्तस्य योगाग्निमयं शरीरम्” मंत्र का उल्लेख करते हुए बताया गया कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि स्वस्थ, संतुलित और सकारात्मक जीवन जीने की संपूर्ण जीवनशैली है।

कार्यक्रम के दौरान ई-आयुष पत्रिका का विधिवत विमोचन किया गया। इस पत्रिका के माध्यम से आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा एवं भारतीय चिकित्सा पद्धतियों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां जन-जन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

इस अवसर पर देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का पश्चिम बंगाल से वर्चुअल संबोधन एवं मार्गदर्शन भी प्राप्त हुआ। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि योग आज भारत की सांस्कृतिक पहचान बनकर पूरी दुनिया को स्वास्थ्य, शांति और सकारात्मकता का संदेश दे रहा है। उन्होंने योग को मानवता के लिए भारत का अमूल्य उपहार बताते हुए सभी से नियमित योग अपनाने का आह्वान किया।

वक्ताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के अथक प्रयासों के कारण संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मान्यता प्रदान की। आज विश्व के सैकड़ों देशों में करोड़ों लोग योग कर भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का सम्मान कर रहे हैं, जो प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व और गौरव का विषय है।

योग प्रशिक्षकों द्वारा विभिन्न योगासन, प्राणायाम एवं ध्यान की विधियों का अभ्यास कराया गया। प्रतिभागियों ने नियमित योग करने का संकल्प लेते हुए समाज में स्वास्थ्य जागरूकता फैलाने का संदेश दिया। कार्यक्रम के दौरान उत्साह, अनुशासन और सकारात्मक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला।

कार्यक्रम के समापन पर सभी अतिथियों, अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, योग प्रशिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं नागरिकों का आभार व्यक्त किया गया। योग दिवस का यह आयोजन स्वास्थ्य, एकता, अनुशासन और भारतीय संस्कृति के प्रति समर्पण का प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरा।

“योग अपनाएं, रोग भगाएं और स्वस्थ भारत के निर्माण में अपना योगदान दें।”

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