महराजगंज। उत्तर प्रदेश के ग्रामीण अंचल से बदलाव की एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने साबित कर दिया है कि गाँव के विकास और समाज सेवा के लिए किसी सरकारी पद या ‘प्रधान’ के टैग की जरूरत नहीं होती। बस दिल में मजबूत इच्छाशक्ति और लोगों की मदद का जज्बा होना चाहिए।
जनपद के मिठौरा गाँव में इस भीषण और रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के बीच एक ऐसा काम हुआ है, जिसकी चर्चा अब पूरे क्षेत्र में हो रही है। यहाँ बिना प्रधान बने ही एक स्थानीय समाजसेवी उत्सव कुमार ने अपने निजी प्रयासों से गाँव में ‘वाटर एटीएम’ (Water ATM) लगवा दिया है।

कड़कड़ाती धूप में राहगीरों और ग्रामीणों को मिला सहारा

इस साल पड़ रही भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों से जहाँ आम जनजीवन बेहाल है, वहीं मिठौरा गाँव के लोगों को अब शुद्ध, शीतल और ठंडे पानी के लिए भटकना नहीं पड़ रहा है। गाँव के दुर्गा मंदिर परिसर में लगा यह वाटर एटीएम इस समय लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

  • शुद्ध और शीतल जल: गाँव वालों के साथ-साथ यहाँ से गुजरने वाले राहगीरों को भी अब चौबीसों घंटे पीने का साफ और ठंडा पानी मिल रहा है।
  • बीमारियों से बचाव: शुद्ध पानी मिलने से गाँव में पानी से होने वाली मौसमी बीमारियों का खतरा भी काफी कम हो गया है।

“बिना पद के भी बदला जा सकता है गाँव का चेहरा”

आमतौर पर देखा जाता है कि लोग गाँव में विकास कार्यों के लिए चुनाव जीतने या प्रधान बनने का इंतजार करते हैं। लेकिन मिठौरा के युवा समाजसेवी उत्सव कुमार के प्रयास ने एक नई नजीर (मिसाल) पेश की है। ग्रामीणों का कहना है कि पद तो आते-जाते रहते हैं, लेकिन जो व्यक्ति बिना किसी स्वार्थ और बिना किसी प्रशासनिक पावर के जनता की सेवा करे, असली ‘प्रधान’ वही है।

गाँव में चर्चा का विषय:
इस सराहनीय कदम के बाद से न सिर्फ मिठौरा गाँव, बल्कि आस-पास के पूरे इलाके में इस काम की जमकर तारीफ हो रही है। लोग कह रहे हैं—“काम करने के लिए नीयत चाहिए, पद नहीं।”

इस वाटर एटीएम के लगने से गाँव की महिलाओं, बुजुर्गों और स्कूली बच्चों को सबसे ज्यादा राहत मिली है, जिन्हें पहले ठंडे पानी के लिए परेशान होना पड़ता था। मिठौरा गाँव का यह मॉडल आज आस-पास के अन्य गाँवों के लिए भी प्रेरणा बन चुका है।

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