गुलशन-ए-इस्लाम, तैबा नगर कुकरा में खुशी का माहौल, संस्थापक हाफ़िज़ क़ारी मोहम्मद अनीसुर्रहमान रहमतुल्लाह अलैह की दीनी सेवाओं को किया गया याद।

गोला (खीरी)। मदरसतुल मदीना गुलशन-ए-इस्लाम, तैबा नगर, कुकरा के लिए सोमवार का दिन बेहद खुशी, गर्व और शुक्र का अवसर बन गया। महज़ 12 वर्ष की आयु में छात्र हाफ़िज़ मोहम्मद आरिफ अत्तारी ने हिफ्ज़-ए-कुरआन मुकम्मल कर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की। इस सफलता पर पूरे मदरसे, क्षेत्र के लोगों और दीनी हलकों में खुशी की लहर दौड़ गई।

मदरसों से जुड़े लोगों ने इसे केवल एक बच्चे की व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि वर्षों की दीनी मेहनत, समर्पण और नेक मिशन का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि ख़तीबे लखीमपुरी एवं नक़ीबे इजलास, हाफ़िज़ क़ारी मोहम्मद अनीसुर्रहमान रहमतुल्लाह अलैह ने जिस उद्देश्य से इस मदरसे की स्थापना की थी और अपनी ज़िंदगी व अपनी ज़मीन को दीन-ए-इस्लाम की ख़िदमत के लिए समर्पित किया था, आज उसका फल समाज के सामने दिखाई दे रहा है।

वक्ताओं ने कहा कि हाफ़िज़ क़ारी मोहम्मद अनीसुर्रहमान रहमतुल्लाह अलैह द्वारा लगाया गया यह इल्म और दीन का पौधा आज एक मजबूत और फलदार दरख़्त बन चुका है, जिसकी शाख़ों से हाफ़िज़-ए-कुरआन तैयार होकर समाज को रोशन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नेक इंसान दुनिया से रुख़्सत हो जाते हैं, लेकिन उनकी दी हुई तालीम और उनके लगाए हुए इल्म के पौधे पीढ़ियों तक लोगों को फायदा पहुँचाते रहते हैं। यही उनके लिए सच्चा सदक़ा-ए-जारीया होता है।

इस अवसर पर हाफ़िज़ क़ारी मोहम्मद अनीसुर्रहमान रहमतुल्लाह अलैह के लिए विशेष दुआ की गई कि अल्लाह तआला उनकी मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी क़ब्र को नूर से भर दे, उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुकाम अता फ़रमाए और उनकी तमाम दीनी ख़िदमतों का सवाब क़यामत तक उन्हें सदक़ा-ए-जारीया के रूप में मिलता रहे।

साथ ही दुआ की गई कि अल्लाह तआला मदरसतुल मदीना गुलशन-ए-इस्लाम, तैबा नगर, कुकरा को दिन-दूनी, रात-चौगुनी तरक्की अता फ़रमाए तथा यहाँ से हमेशा कुरआन के हाफ़िज़, आलिम और दीन के ख़ादिम तैयार होते रहें।

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