उत्तर प्रदेश क्राइम प्रभारी विशाल गुप्ता की रिपोर्ट


उत्तर प्रदेश के बाराबंकी स्थित प्रसिद्ध मंजीठा धाम (नाग देवता मंदिर) का मेला हर साल आषाढ़ पूर्णिमा (गुरु पूर्णिमा) से शुरू होकर नाग पंचमी तक चलता है। सावन मास के दौरान यहां पूरे महीने भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। नाग देवता के दर्शन के लिए प्रदेश के कई जिलों से लोग बाराबंकी पहुंचते हैं।
मान्यता है कि सावन के पूरे महीने और नाग पंचमी के दिन इस मंदिर में श्रद्धापूर्वक मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है। साथ ही, जो लोग सांपों से परेशान हैं या जिन्हें सांपों का डर लगता है, वे यहां दर्शन कर अपनी समस्याओं से मुक्ति पा सकते हैं।
यहां सभी तरह के जहरीले सांपों की अदालत भी लगती है, जहां नाग देवता उन्हें दिशा-निर्देश देते हैं। यह भी कहा जाता है कि सांप काटने पर यदि कोई व्यक्ति यहां पहुंच जाए, तो उसकी जान बच जाती है।
जानकारी के अनुसार, मजीठा गांव के अधिकांश घरों में अक्सर सांप निकलते रहते हैं। ये सांप घरों में निवास करते हैं, लेकिन न तो वे किसी को नुकसान पहुंचाते हैं और न ही ग्रामीण उन्हें मारते हैं। यहां लोग सांपों को दूध पिलाते हैं और उन्हें देखते ही हाथ जोड़कर पूजा-अर्चना करते हैं।
हर साल सावन के महीने में मंदिर में श्रद्धालुओं का जमावड़ा होता है, खासकर नाग पंचमी के दिन यह संख्या कई गुना बढ़ जाती है। पुजारी ने बताया कि बाराबंकी के अलावा कई जिलों और दूसरे राज्यों से भी श्रद्धालु इस चमत्कारी नाग देवता मंदिर में दर्शन करने आते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले साल ब्राजील से भी श्रद्धालु यहां आए थे और मंदिर की शक्तियों से काफी प्रभावित हुए थे।
ऐसी आस्था है कि मंदिर में स्थित मठ पर मिट्टी की मालिया चढ़ाने के बाद इन्हें घरों में रखने से न तो घर के अंदर सांप आते हैं और न ही अन्य जहरीले जीव-जंतु प्रवेश करते हैं।
