मुख्य आरक्षी मनोज कुमार ने सड़क के गड्ढे देखे तो सिर्फ ड्यूटी निभाने तक सीमित नहीं रहे, बल्कि खुद फावड़ा उठाकर उन्हें भरने में जुट गए, ताकि कांवड़ियों के कदम सुरक्षित रहें और उनकी आस्था की राह में कोई बाधा न आए।

वहीं आरक्षी विपिन यादव ने अपनी कमाई का हिस्सा जरूरतमंदों के लिए समर्पित कर यह साबित कर दिया कि वर्दी सिर्फ कानून की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि इंसानियत की भी पहचान है। उन्होंने अपने वेतन से जरूरतमंद एवं मानसिक रूप से विक्षिप्त लोगों को भोजन कराया और उनके चेहरों पर मुस्कान लाने का प्रयास किया।

एक ने सड़क के गड्ढे भरे, दूसरे ने किसी की जिंदगी में भूख का गड्ढा भरने का प्रयास किया। दोनों ने अपने-अपने तरीके से यह संदेश दिया कि सच्ची पुलिसिंग सिर्फ ड्यूटी निभाने में नहीं, बल्कि जरूरत के समय किसी के काम आने में है।

इन दोनों पुलिसकर्मियों की पहल ने ‘वर्दी में फर्ज और दिल में इंसानियत’ की मिसाल कायम की है।

हाथरस से राजा पाठक की रिपोर्ट

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