जौनपुर से जिला ब्यूरो अमन विश्वकर्मा की रिर्पोट

मुंगराबादशाहपुर। आम व्यक्ति या निजी अस्पताल में इलाज के दौरान कथित लापरवाही से किसी मरीज की मौत हो जाए तो पुलिस मामले की जांच कर मुकदमा दर्ज करने तक की कार्रवाई करती है। लेकिन जब किसी सरकारी अस्पताल में इलाज के दौरान कथित लापरवाही से मरीज की जान चली जाए, तो क्या केवल डॉक्टर का ट्रांसफर ही कार्रवाई का अंतिम रास्ता होना चाहिए?
मुंगराबादशाहपुर में सर्पदंश से एक अल्पायु युवक की मौत के मामले ने स्वास्थ्य व्यवस्था और डॉक्टरों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पत्रकार साथी सूरज विश्वकर्मा के भाई की सर्पदंश के बाद मौत हुई। परिजनों का आरोप है कि यदि समय रहते उचित इलाज मिल जाता तो शायद युवक की जान बचाई जा सकती थी।
मामले में सीएमओ गंगा राम की ओर से संबंधित डॉक्टर ओम प्रकाश का ट्रांसफर किया गया है। लेकिन सवाल यह है कि अगर जांच में चिकित्सकीय लापरवाही की पुष्टि होती है तो क्या महज ट्रांसफर को पर्याप्त कार्रवाई माना जाएगा?
ट्रांसफर से सवाल खत्म नहीं होंगे
किसी डॉक्टर को एक स्थान से दूसरे स्थान भेज देने से प्रशासनिक स्तर पर समस्या भले ही खत्म दिखाई दे, लेकिन यदि वास्तव में इलाज में लापरवाही हुई है और उससे किसी मरीज की जान गई है, तो जवाबदेही तय होना जरूरी है।
परिजनों और पीड़ित परिवार की पीड़ा को देखते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष मेडिकल जांच होनी चाहिए। इलाज के समय डॉक्टर ने क्या उपचार किया, मरीज को कब देखा गया, कौन-कौन सी दवाएं दी गईं, रेफर करने की जरूरत थी या नहीं और निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन हुआ या नहीं—इन सभी बिंदुओं की जांच होनी चाहिए।
यदि जांच में चिकित्सकीय लापरवाही सामने आती है तो नियमों के अनुसार विभागीय कार्रवाई के साथ पुलिस स्तर पर भी विधिक कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी अन्य गरीब परिवार को ऐसी पीड़ा न झेलनी पड़े।
सवाल सिर्फ एक डॉक्टर के ट्रांसफर का नहीं है, सवाल उस परिवार की जिंदगी का है जिसने अपना बेटा खो दिया। अगर गलती हुई है तो जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए—क्योंकि ट्रांसफर समाधान नहीं, जवाबदेही जरूरी है।
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