जनपद बाराबंकी अंतर्गत ग्राम शाहपुर में श्रावण शुक्ल पक्ष की पंचमी पर नाग पंचमी का पर्व श्रद्धा और उत्सव के साथ मनाया गया ग्रामीणों में सुबह से ही मां दुर्गा मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ देखी गई लोगों ने इस अवसर पर क्षेत्र में वर्षा से चली आ रही गुड़िया कूटने के परंपरा भी निभाई गई बालिकाएं कपड़े की गुड़िया लेकर पहुंचे जिन्हें बच्चों ने पेड़ की पतली टहनियों से कूटा पौराणिक मान्यताओं के अनुसार श्रावण शुक्ल पंचमी के दिन आस्तिक मुनि ने एक यज्ञ को रुकवा कर नागों की रक्षा की थी
माना जाता है कि उनके प्रयासों से तक्षक नाग सहित संपूर्ण नागवंश बच गया था इसी घटना की स्मृति से नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा की परंपरा चली आ रही है श्रद्धालु नाग देवता को दूध अर्पित कर सुख समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं या पर्व नाग के प्रति सम्मान और प्राकृतिक के साथ अस्तित्व का प्रतीक है गुड़िया कूटने के परंपरा के पीछे पौराणिक तथा प्रचलित है इसके अनुसार एक बालक भगवान शिव का परम भक्त था वह प्रतिदिन मंदिर जाता था मंदिर में उसे नाग देवता के दर्शन होते थे और उन्हें दूध पिलाता है जिससे दोनों के बीच गहरा लगाव हो गया एक दिन बालक अपनी बहन के साथ मंदिर पहुँचा नाग उसके पैरों में लिपट गया जिसे देखकर बहन ने भाई को सांप से बचाने का प्रयास में नाग को पीट कर मार दिया बाद में जब उसे सच्चाई का पता चला तो उसे बहुत पश्चाताप हुआ कहा जाता है कि इस घटना के स्मृति में नाग पंचमी पर बहने कपड़े की गुड़िया बनाकर डालती हैं और बच्चे उन्हें डंडों से कूटते हैं इस प्रकार क्षेत्र में लोगों ने इन दोनों परंपराओं का पालन करते हुए इस दिन नाग देवता की पूजा अर्चना की और परिवार की सुख शांति की कामना की रिपोर्टर कृष्णानंद वर्मा

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