ताले की चाबी किसके पास थी? किसके कहने पर खुला रास्ता?

शारदानगर बैराज की सुरक्षा में सेंध या मिलीभगत?
ताले की चाबी किसने दी, किसके इशारे पर खुला प्रतिबंधित रास्ता?
“अंदर जाकर वीडियो बनाया… लेकिन रोकने वाला कोई नहीं! आखिर सुरक्षा व्यवस्था सो रही थी या किसी की मिलीभगत से खुला था रास्ता?”
शारदानगर। शारदा बैराज जैसे संवेदनशील और सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान पर अगर कोई व्यक्ति प्रतिबंधित ट्रैक के अंदर पहुंचकर वीडियो क्लिप बना रहा है, तो यह महज एक रील का मामला नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि—
रास्ते पर लगा ताला आखिर किसने खोला?
चाबी किसके पास थी?
किसके कहने पर अंदर जाने की अनुमति मिली?
अगर अनुमति नहीं थी तो युवक अंदर तक पहुंचा कैसे?
क्या सुरक्षा में तैनात कर्मचारियों को इसकी जानकारी नहीं थी?
क्या कोई भी व्यक्ति सुरक्षा व्यवस्था को धता बताकर संवेदनशील क्षेत्र में पहुंच सकता है?
बाढ़ और जलप्रबंधन की दृष्टि से महत्वपूर्ण शारदा बैराज में सुरक्षा को लेकर सामने आया यह मामला केवल एक वीडियो तक सीमित नहीं रहना चाहिए।
वीडियो क्लिप बनाने वाला अंदर कैसे पहुंचा और उसे प्रवेश दिलाने वाला कौन था—इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।
_ अब सवाल सिर्फ चाबी का नहीं, जवाबदेही का है!_
अगर चाबी किसी ने दी तो वह कौन था?
अगर किसी ने नहीं दी तो ताला खुला कैसे?
और अगर सुरक्षा व्यवस्था इतनी मजबूत है, तो व्यक्ति अंदर पहुंचा कैसे?
जिम्मेदार कौन?
संबंधित विभाग को पूरे मामले की जांच कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश कैसे हुआ और सुरक्षा नियमों का उल्लंघन किस स्तर पर हुआ
सवाल वही, जो जवाब मांगते हैं।
अंशू तिवारी
