
उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के जिला अध्यक्ष श्री शैलेंद्र शर्मा ने ज्ञापन पढ़ते हुए कहा देश में डिजिटल पेमेंट व्यवस्था को जन-जन तक पहुंचाने में UPI ने बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। इससे आम नागरिक, व्यापारी, ग्राहक तथा छोटे दुकानदारों के लिए पेमेंट प्रक्रिया पहले की अपेक्षा कहीं अधिक सरल, त्वरित, स्वीकार्य एवं मददगार हुई है। इसीलिए देश का व्यापारी वर्ग भी डिजिटल पेमेंट व्यवस्था को बढ़ाने में निरंतर सहयोग करता रहा है।
लेकिन 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के कुछ व्यापारी-आधारित UPI लेन-देन पर MDR लागू होने की व्यवस्था को लेकर व्यापारी एसबीआई छोटे, मध्यम एवं फुटकर के बीच व्यावहारिक चिंता उत्पन्न हुई है। यद्यपि वर्तमान व्यवस्था में छोटे व्यापारी की कुछ नियुक्तियों को शून्य MDR का संरक्षण दिया गया है, फिर भी जमीनी स्तर पर अनेक ऐसे छोटे व्यापारी हैं जिनके वास्तविक व्यापारिक स्वरूप और UPI पर निर्भरता निर्धारित सीमा से अलग हो सकती है।
माननीय प्रधानमंत्री जी, छोटे व्यापारी की समस्या केवल शुल्क की राशि तक सीमित नहीं है। उसके लिए प्रत्येक भुगतान उसकी मेहनत, सीमित लाभांश और दिनभर के व्यापार का हिस्सा होता है। किराना, कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल, हार्डवेयर, दवा, ऑटो पार्ट्स, छोटे सेवा संस्थान तथा अन्य फुटकर व्यापार में कई बार एक ही ग्राहक का भुगतान ₹2,000 से अधिक होता है, जबकि व्यापारी का लाभ मार्जिन बहुत सीमित रहता है।
ऐसी स्थिति में UPI लेन-देन पर MDR का अतिरिक्त भार छोटे व्यापारी के लिए वास्तविक लागत बढ़ा सकता है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि व्यापार में आने वाली किसी भी अतिरिक्त लागत का अंतिम प्रभाव प्रायः उपभोक्ता पर ही पड़ता है। कोई भी व्यापारी लंबे समय तक अतिरिक्त लागत अपनी जेब से वहन नहीं कर सकता। अतः MDR का भार अंततः वस्तुओं एवं सेवाओं की शर्तों के माध्यम से आम उपभोक्ता तक पहुँचने की संभावना रहती है। इससे महंगाई और कंज्यूमर के खर्च पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। इससे डिजिटल पेमेंट को बढ़ाने की गति, मर्चेंट की लागत संरचना तथा छोटे व्यापार की प्रतिस्पर्धी क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की खतरे व्यापार जगत में व्यक्ति की जा रही है।
उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल की ओर से हमारा विनम्र आग्रह है कि-
- छोटे, मध्यम एवं फुटकर मर्चेंट पर पड़ने वाले MDR के प्रभाव का पुनः व्यापक रूप से अध्ययन किया जाए।
- छोटे एवं फुटकर मर्चेंट के लिए UPI पेमेंट व्यवस्था को पूर्णतः शुल्क मुक्त रखने के विकल्प पर संशोधन किया जाए।
- ऐसे मर्चेंट के लिए केवल UPI से प्राप्त मासिक राशि के आधार पर सीमा निर्धारित करने के बजाय उनके वास्तविक व्यापारिक स्वरूप एवं व्यापार की प्रकृति को भी ध्यान में रखा जाए।
- यदि किसी श्रेणी में MDR व्यवस्था आवश्यक समझी जाए तो छोटे मर्चेंट को उससे पर्याप्त एवं व्यावहारिक संरक्षण दिया जाए।
- ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिससे डिजिटल पेमेंट भी मजबूत रहे और छोटे व्यापारी पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी न पड़े।
- 15 अक्टूबर 2026 से प्रस्तावित व्यवस्था को लागू करने से पूर्व देश के प्रमुख व्यापारी संगठनों के सामने के साथ व्यापक विचार-विमर्श एवं परामर्श किया जाए, ताकि जमीन खरीदारों को समझकर व्यावहारिक व्यवस्था बनाई जा सके। 7. UPI के व्यापक प्रसार और डिजिटल इंडिया के उद्देश्यों को देखते हुए वर्तमान डिजिटल भुगतान व्यवस्था की सरलता, विश्वसनीयता एवं मजबूती को कमजोर करने वाला कोई अनावश्यक आर्थिक अवरोध उत्पन्न न हो।
पिछले दशकों में देश में UPI एवं डिजिटल भुगतान के प्रचलन को जिस तेजी से बढ़ावा मिला है, उसने अर्थव्यवस्था को अधिक समावेशी और टिकाऊ बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ऐसे समय में MDR का अतिरिक्त भार लागू होने से छोटे व्यापारियों एवं उपभोक्ताओं में डिजिटल भुगतान के प्रति अनावश्यक हिचक पैदा होने की आशंका है। इसका परिणाम कहीं ऐसा न हो कि कुछ लोग पुनः कैश लेन-देन की ओर लौट लगें, जिससे डिजिटल भुगतान के विस्तार की गति प्रभावित होने के साथ-साथ कैश अर्थव्यवस्था के बढ़ने की संभावना भी पैदा हो। इसलिए डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने वाली वर्तमान व्यवस्था को अनावश्यक रूप से प्रभावित न किया जाए।
हमारा आशय किसी भी रूप में डिजिटल भुगतान व्यवस्था का विरोध करना नहीं है। इसके विपरीत, UPI की सफलता और उसके विश्वास को बनाए रखना ही व्यापार जगत के हित में है। हमारा निवेदन केवल इतना है कि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले छोटे एवं फुटकर व्यापारियों की वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ऐसी व्यवस्था हो, जो डिजिटल इंडिया के उद्देश्यों को और मजबूत करे तथा व्यापारी वर्ग के हितों की भी रक्षा करे।
इसलिए उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल की ओर से विनम्र अनुरोध है कि 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाली प्रस्तावित MDR व्यवस्था के छोटे एवं फुटकर व्यापारियों पर पड़ने वाले प्रभाव पर संशोधन करते हुए उन्हें इससे मुक्त रखने अथवा आवश्यक राहत प्रदान करने की दिशा में उचित निर्णय लिया जाए।
हमें पूरा विश्वास है कि माननीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में सरकार छोटे व्यापारियों की इस व्यावहारिक चिंता पर संवेदनशीलता से विचार करेगी और डिजिटल भुगतान व्यवस्था तथा व्यापारी हितों के बीच संतुलन स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त करेगी।
शाहिद शमसी शोएब मोहम्मद खान वाजिद अली इमरान सलीम हारीस शम्सी बिलाल शमसी खान गप्पल भाई मुराद खान प्रदीप खंडेलवाल राम गुप्ता शकेब अहमद उज़ैर अहमद जगन्नाथ चावल नासिर खान फैसल हबीब इमरान सलीम चंद्र प्रकाश रस्तोगी अनिल अरोरा अवतार सिंह काशिफ खान नासिर खान मुकेश आर्य पुष्कर अग्रवाल ऋषि जमाल
आदि मौजूद थे
