तहसील प्रभारी रिपोर्ट गंगा चरण एमडी न्यूज़

मोहनलालगंज तहसील के ग्राम खरगापुर में सरकारी रास्ते पर कब्जे का हैरान करने वाला मामला। यहाँ बृजेश पुत्र महादेव ने 2019 में ग्राम पंचायत द्वारा बनवाए गए सार्वजनिक इंटरलॉकिंग रास्ते पर बैरियर लगा कर फरमान जारी किया है “गाँव के सब लोग निकल सकते हैं, लेकिन प्रदीप कुमार, शिव किशोर और मोती को मैं पर्सनल तौर पर नहीं निकलने दूंगा।”पीड़ित प्रदीप कुमार ने बताया कि यह रास्ता 20 साल से आबादी का मुख्य सार्वजनिक रास्ता है। लेखपाल की जांच में भी बृजेश ने यही कहा कि वह अन्य सभी को जाने देगा, सिर्फ इन तीन लोगों को नहीं जाने देगा।SDM कह रहे हैं दीवानी जाओ, जबकि मामला राजस्व कापीड़ित जब उपजिलाधिकारी (SDM) मोहनलालगंज के पास शिकायत की”, जबकि यह मामला पूरी तरह राजस्व विभाग का है।
ग्रामीणों का कहना है आबादी की जमीन और पंचायत के रास्ते से अवैध बैरियर हटवाना धारा 67 और 133 CrPC के तहत SDM का ही अधिकार है। अगर रास्ता निजी होता तो सरकार उस पर इंटरलॉकिंग क्यों लगवाती?पीड़ितों ने मांग की है कि पर्सनल दुश्मनी के कारण लगाए गए बैरियर को तत्काल हटवाया जाए और सार्वजनिक रास्ते पर “इनको नहीं निकलने दूंगा” जैसी गुंडई पर रोक लगाई जाए।पीड़ित
और वह 1862 का नक्शा दिखा रहे हैं यही सबसे बड़ा धोखा है 1862 का नक्शा दिखाना
भैया यही सबसे बड़ा धोखा है 1862 का नक्शा दिखाना।SDM को प्रभावित करने के लिए बृजेश 160 साल पुराना नक्शा दिखा रहा है, जबकि कानून कहता है -1862 के नक्शे का झांसा SDM को गुमराह करने की कोशिशविपक्षी बृजेश द्वारा 1862 का नक्शा दिखाकर SDM को गुमराह किया जा रहा है, जबकि कानून में 1862 के नक्शे की कोई वैधता नहीं है।कानूनी तथ्य जो SDM को देखना चाहिए -1. 1862 का नक्शा आज अमान्य है राजस्व संहिता के अनुसार खतौनी और नक्शे हर 6 साल में चकबंदी / पुनरीक्षण में बदलते हैं। 1862 के बाद 10 बार नक्शा बदला जा चुका है। आज का वैध नक्शा आबादी2. सरकारी पैसा निजी जमीन पर नहीं लगता – अगर 1862 के नक्शे में वह जमीन बृजेश की होती तो 2019 में ग्राम पंचायत सरकारी धन से उस पर इंटरलॉकिंग क्यों लगवाती? पंचायत ने पैसा लगाया मतलब जमीन पंचायत की / आबादी की है, यह सबसे बड़ा सबूत है।3. सुप्रीम कोर्ट का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने कई बार कहा है कि “पुराने नक्शे से ज्यादा मौजूदा मौके की स्थिति और 20 साल से सार्वजनिक उपयोग मायने रखता है।” यहाँ ,50साल से सभी ग्रामीण उसी रास्ते से निकल रहे हैं।इसलिए SDM महोदय से निवेदन है कि 1862 के अमान्य नक्शे के झांसे में आकर पीड़ित प्रदीप कुमार और शिव किशोर का हक न मारा जाए। 1862 का नक्शा दिखाना सिर्फ कब्जे को जायज ठहराने की चाल है, जबकि मौके पर सरकारी इंटरलॉकिंग रोड मौजूद है।
