पुलिस कर्मियों को मूक-बधिर नागरिकों से संवेदनशील एवं प्रभावी संवाद का दिया गया प्रशिक्षण

महराजगंज। अंतर्राष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस के अवसर पर पुलिस अधीक्षक महराजगंज शक्ति मोहन अवस्थी के निर्देशन में पुलिस लाइन महराजगंज में सांकेतिक भाषा प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य पुलिस कर्मियों को मूक-बधिर नागरिकों की समस्याओं, आवश्यकताओं और अधिकारों के प्रति अधिक संवेदनशील बनाना तथा उनके साथ प्रभावी संवाद स्थापित करने के लिए आवश्यक जानकारी एवं प्रशिक्षण प्रदान करना रहा।

कार्यशाला में विशेषज्ञों द्वारा पुलिस कर्मियों को सांकेतिक भाषा की मूलभूत जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि मूक-बधिर नागरिकों से बातचीत करते समय धैर्य, संवेदनशीलता और सम्मान का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। पुलिसकर्मियों को यह भी समझाया गया कि किसी शिकायत, घटना अथवा पुलिस सहायता की आवश्यकता के दौरान संवाद में आने वाली कठिनाइयों को दूर करने के लिए सांकेतिक भाषा महत्वपूर्ण माध्यम साबित हो सकती है।

विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण के दौरान पुलिस कर्मियों को विभिन्न सामान्य संकेतों एवं उनके अर्थों से अवगत कराया। साथ ही ऐसी परिस्थितियों के बारे में भी जानकारी दी गई, जिनमें मूक-बधिर व्यक्ति अपनी समस्या मौखिक रूप से व्यक्त नहीं कर पाते हैं। ऐसे मामलों में पुलिसकर्मियों को धैर्यपूर्वक उनकी बात समझने, आवश्यक जानकारी प्राप्त करने और उन्हें उचित सहायता उपलब्ध कराने के तरीकों का प्रशिक्षण दिया गया।

कार्यशाला में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि पुलिस सेवा समाज के प्रत्येक वर्ग के लिए समान रूप से सुलभ और संवेदनशील होनी चाहिए। दिव्यांग एवं विशेष आवश्यकता वाले नागरिकों के साथ पुलिस का व्यवहार सहयोगपूर्ण और सम्मानजनक होना चाहिए, ताकि वे बिना किसी संकोच के अपनी शिकायत अथवा समस्या पुलिस के समक्ष रख सकें।

पुलिस अधिकारियों ने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण से पुलिस कर्मियों की कार्यक्षमता बढ़ने के साथ-साथ आमजन और पुलिस के बीच विश्वास भी मजबूत होगा। सांकेतिक भाषा की जानकारी होने से मूक-बधिर नागरिकों से संबंधित शिकायतों, दुर्घटनाओं, आपराधिक घटनाओं अथवा आपातकालीन परिस्थितियों में पुलिस बेहतर तरीके से उनकी सहायता कर सकेगी।

कार्यशाला के माध्यम से पुलिस कर्मियों को यह संदेश भी दिया गया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ समाज के प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना पुलिस की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। सांकेतिक भाषा का प्रशिक्षण इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।कार्यशाला के दौरान पुलिस कर्मियों ने विशेषज्ञों से सांकेतिक भाषा से संबंधित जानकारी प्राप्त की और प्रशिक्षण में सक्रिय रूप से सहभागिता की। अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि प्रशिक्षण के बाद पुलिस कर्मी मूक-बधिर नागरिकों के साथ संवाद स्थापित करने और उनकी समस्याओं को समझने में अधिक सक्षम होंगे।

2 views

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed