डीपफेक और वॉयस क्लोनिंग पर रोक के लिए केंद्र सरकार व NHRC को भेजा पत्र, स्वतंत्र AI नियामक प्राधिकरण बनाने की मांग

महराजगंज। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के बीच इसके संभावित दुरुपयोग और उससे पैदा हो रहे नए साइबर अपराधों को लेकर महराजगंज के अधिवक्ता, सामाजिक कार्यकर्ता एवं Border Lawyers Trust के को-फाउंडर विनय कुमार पांडे ने गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने AI आधारित अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए भारत सरकार, दूरसंचार विभाग से जुड़े अधिकारियों, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) सहित संबंधित शीर्ष संस्थाओं को पत्र भेजकर कड़े कानूनी प्रावधान बनाने की मांग की है।

अधिवक्ता विनय कुमार पांडे ने अपनी पहल को ‘AI क्राइम याचिका’ के रूप में प्रस्तुत करते हुए कहा है कि डिजिटल तकनीक के बदलते स्वरूप के साथ अपराध के तौर-तरीके भी तेजी से बदल रहे हैं। डीपफेक तकनीक के जरिए किसी व्यक्ति के चेहरे और आवाज में कृत्रिम बदलाव कर फर्जी वीडियो तैयार किए जा सकते हैं, जबकि वॉयस क्लोनिंग के माध्यम से परिचित व्यक्ति की आवाज की नकल कर साइबर ठगी को अंजाम देने के मामले सामने आ रहे हैं।उन्होंने चिंता जताई कि AI के दुरुपयोग का प्रभाव केवल आर्थिक अपराधों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे किसी व्यक्ति की निजता, प्रतिष्ठा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता भी प्रभावित हो सकती है। विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों को निशाना बनाकर अश्लील डीपफेक तस्वीरें एवं वीडियो तैयार किए जाने को उन्होंने गंभीर सामाजिक और मानवाधिकार संबंधी चुनौती बताया है।

याचिका में केंद्र सरकार से स्वतंत्र AI रेगुलेटरी अथॉरिटी गठित करने की मांग की गई है। प्रस्तावित नियामक संस्था के माध्यम से AI तकनीक, एल्गोरिदम और प्लेटफॉर्म की सुरक्षा व्यवस्था, जवाबदेही तथा दुरुपयोग से संबंधित शिकायतों की निगरानी किए जाने की बात कही गई है।विनय कुमार पांडे ने AI से जुड़े कानूनों में आवश्यक संशोधन करने तथा भारत में सेवाएं उपलब्ध कराने वाली तकनीकी कंपनियों के लिए मजबूत सुरक्षा प्रोटोकॉल और जिम्मेदार AI मानकों को अनिवार्य करने की मांग भी उठाई है।

उन्होंने कहा कि तकनीक के विस्तार के साथ कानून और नियामक व्यवस्था का भी समयानुकूल होना आवश्यक है। AI का सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए सरकार, तकनीकी कंपनियों और कानून लागू करने वाली एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय जरूरी है।इस पहल के माध्यम से AI आधारित अपराधों, नागरिकों की डिजिटल सुरक्षा और मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दों पर नीति-निर्माताओं का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया गया है।

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