संगीत, कला और खेल से समग्र विकास का संदेश, अभिविन्यास कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने दिए उपयोगी सुझाव


वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय में संगीत एवं मंच कला संकाय की ओर से आयोजित त्रिदिवसीय अभिविन्यास कार्यक्रम के द्वितीय दिवस का आयोजन विभिन्न ज्ञानवर्धक व्याख्यानों एवं संवादात्मक सत्रों के साथ हुआ। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को प्रकृति एवं जीव-जगत में संगीत, नृत्य और कला की उपस्थिति, आत्म-प्रबंधन, आत्म-विकास, खेल एवं शारीरिक गतिविधियों की भूमिका तथा संगीत के माध्यम से मानसिक, शारीरिक एवं भावनात्मक कल्याण जैसे विषयों पर विशेषज्ञों का मार्गदर्शन मिला।
कार्यक्रम में संगीत एवं मंच कला संकाय की संकायाध्यक्ष प्रो. संगीता पंडित की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस अवसर पर पूर्व संकायाध्यक्ष प्रो. के. शशिकुमार, छात्र सलाहकार प्रो. के. अमरीश चंचल, प्रो. राम शंकर, प्रो. जी.सी. पांडेय, प्रो. सीता भट्ट, डॉ. सुप्रिया शाह, डॉ. हंसारकेश कुमार, डॉ. विजय कुमार सहित संकाय के अन्य प्राध्यापक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
प्रथम वक्ता प्रो. अखिलेश रघुवंशी ने ‘प्रकृति में संगीत, नृत्य एवं कला’ विषय पर विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने प्रकृति और कला के गहरे संबंध पर प्रकाश डालते हुए प्रकृति तथा जीव-जगत में मौजूद लय, गति, ध्वनि एवं अभिव्यक्ति के विभिन्न स्वरूपों को समझाया।
द्वितीय वक्ता डॉ. विकास के. जायसवाल ने ‘आत्म-प्रबंधन’ विषय पर विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने समय, अध्ययन, विश्राम और करियर के बीच संतुलन स्थापित करने के साथ अनुशासन, सकारात्मक आदतों एवं निरंतर आत्म-सुधार के महत्व पर चर्चा की।
प्रो. बी.सी. कपड़ी ने मानव शरीर के विकास में खेल एवं शारीरिक गतिविधियों के महत्व पर विचार रखे। उन्होंने स्वस्थ एवं संतुलित जीवन के लिए नियमित व्यायाम, खेल और सक्रिय जीवनशैली को आवश्यक बताते हुए विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में शारीरिक गतिविधियों को उचित स्थान देने के लिए प्रेरित किया।
चतुर्थ वक्ता प्रो. अभ्रजिता बनर्जी, प्राचार्य, नाट्यवेद कॉलेज ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स, तिरुवनंतपुरम, केरल ने ‘संगीत एवं कल्याण’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने संगीत के मानसिक, शारीरिक एवं भावनात्मक प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए आत्म-अभिव्यक्ति, मानसिक संतुलन एवं आंतरिक शांति में संगीत की भूमिका को समझाया।
कार्यक्रम के विभिन्न सत्रों में विद्यार्थियों के समग्र विकास पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने कला एवं संगीत के साथ समय-प्रबंधन, आत्म-विकास, शारीरिक सक्रियता तथा मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य को भी व्यक्तित्व विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। द्वितीय दिवस विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक, संवादात्मक एवं प्रेरणादायी रहा।

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