66 वर्षों से मां दुर्गा की आराधना में जुटी काशी दुर्गोत्सव समिति, चार दिनों तक चला प्रसाद वितरण

सिंदूर खेला के साथ मां दुर्गा को दी जाएगी विदाई, प्रतिदिन 500 से 1500 श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद

वाराणसी। धर्म और संस्कृति की नगरी काशी में दुर्गापूजा की परंपरा को जीवंत बनाए रखने में काशी दुर्गोत्सव समिति, चेतसिंह किला, हरिश्चंद्र रोड, शिवाला की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। समिति पिछले 66 वर्षों से मां दुर्गा की आराधना और धार्मिक आयोजनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को जोड़ रही है। नवरात्र के दौरान यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां के दर्शन करने पहुंच रहे हैं और प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं।
समिति की ओर से आयोजित भोग एवं प्रसाद वितरण में प्रतिदिन लगभग 500 से 1500 श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। इस वर्ष नवरात्र में एक दिन की अतिरिक्त बढ़ोतरी होने के कारण सप्तमी, अष्टमी और नवमी के साथ प्रसाद वितरण का कार्यक्रम कुल चार दिनों तक चला। इस दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।
सिंदूर खेला के साथ होगा मां को विदाई देने का आयोजन
दुर्गापूजा के समापन अवसर पर बुधवार को समिति की ओर से सिंदूर खेला का आयोजन किया जाएगा। इस पारंपरिक आयोजन में महिलाएं मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित कर सुख-समृद्धि और सौभाग्य की कामना करेंगी। इसके साथ ही एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर मां दुर्गा को भावपूर्ण विदाई दी जाएगी। यह आयोजन बंगाली संस्कृति और दुर्गापूजा की परंपराओं का प्रमुख हिस्सा है।
समिति के पदाधिकारी एवं जिम्मेदारियां
काशी दुर्गोत्सव समिति के अध्यक्ष अशोक कांति चक्रबरती हैं। जनरल सेक्रेटरी की जिम्मेदारी अभिजीत चौधरी संभाल रहे हैं। भोग सेक्रेटरी के रूप में मनीष भट्टाचार्य कानू भट्टाचार्यऔर प्रसून भट्टाचार्य कार्यरत हैं। मीडिया प्रभारी अविनाश भट्टाचार्य तथा स्मारिका प्रभारी (Souvenir In-charge) चैताली भट्टाचार्य ट्रेजरार आशीष दास गुप्ता हैं।
समिति की 66 वर्षों की परंपरा धार्मिक आस्था, सामाजिक सहभागिता और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। हर वर्ष की तरह इस बार भी मां दुर्गा की पूजा-अर्चना और प्रसाद वितरण में श्रद्धालुओं की भागीदारी ने आयोजन को विशेष बना दिया।

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