शिवपुर फलाहारी बाबा आश्रम मे नौ दिवसीय महायज्ञ का समापन भंडारे के साथ देर शाम हुआ संपन्न।

रोहित सेठ

वाराणसी शिवपुर फलाहारी बाबा आश्रम नौ दिवसीय महायज्ञ का समापन भंडारे के साथ सोमवार देर शाम संपन्न हुआ। शिवपुर रामलीला मैदान में काशी के सभी महंत आए हुए संत समागम हुआ । आरती वचन प्रदान किया बड़ी संख्या में जुटे साधु-संतों को विदाई दी गई उस दौरान भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहले हवन यज्ञ में आहुति डाली। उसके बाद उन्होंने महाप्रसाद ग्रहण किया। श्रीलक्ष्मी नारायण महायज्ञ का आचार्य जितेन्द्र तिवारी के नेतृत्व में करवाया गया।

फलाहारी बाबा आश्रम के मंहत रामदास त्यागी एवं आयोजक विनोद कुमार दूबे के सहयोग से लगातार नौ दिनों तक धार्मिक अनुष्ठान कराया गया। मंहत रामदास त्यागी ने बताया कि हवन यज्ञ से वातावरण व वायुमंडल शुद्ध होने के साथ व्यक्ति को आत्मिक बल मिलता है। व्यक्ति में धार्मिक आस्था जागृत होती है। दुर्गुणों की बजाय सद्गुणों के द्वार खुलते हैं। यज्ञ से देवता प्रसन्न होकर मनोवांछित फल प्रदान करते हैं। उन्होंने बताया कि श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ से व्यक्ति भव सागर पार हो जाता है। श्रीलक्ष्मी नारायण महायज्ञ से जीव में भक्ति, ज्ञान व वैराग्य के भाव उत्पन्न होते हैं। धार्मिक आयोजनों से व्यक्ति के पाप पुण्य में बदल जाते हैं। विचारों में बदलाव होने पर व्यक्ति के आचरण में भी स्वयं बदलाव हो जाता है। उहोंने भंडारे के प्रसाद का भी वर्णन किया। उन्होंने कहा कि प्रसाद तीन अक्षर से मिलकर बना है। पहला जवाब प्र का अर्थ प्रभु, दूसरा सा का अर्थ साक्षात व तीसरा द का अर्थ होता है दर्शन। उसे हम सब प्रसाद कहते हैं। प्रसाद हर धार्मिक आयोजन या अनुष्ठान का तत्वसार होता है जो मन, बुद्धि व चित्त को निर्मल कर देता है। मनुष्य शरीर भी ‘भगवान का दिया हुआ सर्वश्रेष्ठ प्रसाद है। जीवन में प्रसाद का अपमान करने से भगवान का ही अपमान होता है। भगवान को लगाए गए भोग का बचा हुआ शेष भाग मनुष्यों के लिए प्रसाद बन जाता है। महायज्ञ एवं संत समागम में उपस्थित मुख्य यजमान विनोद कुमार दूबे मंहत रामदास त्यागी, प्रचार मंत्री कमलेश केशरी, कोषाध्यक्ष आनंद अग्रवाल, आचार्य जितेन्द्र तिवारी ,अभय सिंह उपस्थित रहे।

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