ब्रेकफास्ट विद डीएम : उड़ान विजेता बच्चों का शानदार स्वागत, डीएम ने स्वयं परोसे लजीज व्यंजन

डीएम संग उड़ान विजेता बच्चों ने उड़ाई दावत, खिले चेहरे
ब्रेकफास्ट में शामिल हुए बच्चों के शिक्षक, अभिभावक ।

लखीमपुर खीरी 22 मई , रविवार का दिन परिषदीय विद्यालयों के नाम व खास रहा। उड़ान के शानदार परफॉर्मर उनके शिक्षक-अभिभावक सहित स्कूल ऑफ द वीक में चयनित प्रधानाध्यापक “ब्रेकफास्ट विद डीएम” मुहिम का हिस्सा बने। परफार्मर बच्चों को डीएम ने स्टार ऑफ द लखीमपुर खिताब से न केवल नवाजा बल्कि बच्चों से केक कटवाया और पुरस्कृत किया।

तय कार्यक्रम पर सुबह ठीक 10 बजे आमंत्रित सभी 13 शख्सियतों को डीएम आवास पर पहुंचने का सिलसिला शुरू हुआ। डीएम ने परिवार संग सभी को रिसीव किया। डीएम की पुत्रियों ने पुष्पगुच्छ देकर स्वागत व अभिनंदन किया। कार्यक्रम शुरू हो इससे पहले डीएम ने सभी को पूरे आवास का पैदल भ्रमण कराने के बाद उन्हें पूरे सम्मान के साथ डाइनिंग टेबल पर बिठाया। यही नहीं डीएम ने परिवार संग उनके संग ब्रेकफास्ट किया। इस दौरान उन्होंने विजेता बच्चों से न केवल बातचीत की बल्कि उन्हें स्वयं ब्रेकफास्ट भी परोसा।

उड़ान विजेता बच्चों को डीएम साहब ने किया सम्मानित
खीरी में परिषदीय विद्यालयों में अभिनव पहल के तहत शुरू उड़ान प्रतियोगिता में बच्चों ने शानदार प्रदर्शन किया। इसमें उप्रा विद्यालय सनिगवां की सविता भारती ने प्रथम, उप्रा विद्यालय बंगलहाकुटी की रूमा देवी द्वितीय, संवि. विद्यालय होलागढ़ की सारिका वर्मा व उप्रा विद्यालय सिकटिया के आयुष ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। इन सभी विजेता बच्चों को डीएम ने पुरस्कार देकर सम्मानित किया। डीएम के हाथों पुरस्कार पाकर बच्चों के चेहरे खिल उठे। डीएम ने बच्चों को पुरस्कार स्वरूप लंच बॉक्स, पानी की बॉटल, ज्योमेट्री बॉक्स, कलर पेंसिल का एक बेहतरीन पैकेट सहित खिलौने प्रदान किए।
उड़ान विजेताओ को मिला स्टार ऑफ द लखीमपुर का खिताब, काटा केक
डीएम श्री महेंद्र बहादुर सिंह ने उड़ान में शानदार प्रदर्शन करने वाले परिषदीय विद्यालय के बच्चों को ना केवल ब्रेकफास्ट पर आमंत्रित किया बल्कि उन्हें स्टार ऑफ द लखीमपुर के खिताब से नवाजा। डीएम व उनकी धर्मपत्नी जिला आकांक्षा समिति अध्यक्ष अल्पना सिंह ने बच्चों से “स्टार ऑफ द लखीमपुर” लिखा केक कटवाया। केक कटते ही पूरा कक्ष तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। विजेता बच्चों के शिक्षकों, अभिभावकों की खुशी का ठिकाना ना रहा।

ब्रेकफास्ट में परोसे गए स्वादिष्ट व्यंजन
ब्रेकफास्ट विद डीएम कार्यक्रम में लजीज व्यंजन परोसे गए। सभी व्यंजनों का चयन स्वयं डीएम की पत्नी व आकांक्षा समिति अध्यक्ष अल्पना सिंह ने किया, इस कार्यक्रम के लिए वह स्वयं कई दिनों से उत्साह के साथ तैयारियों में जुटी रही।

ब्रेकफास्ट टेबल पर इन्होंने की शिरकत
डीएम महेंद्र बहादुर सिंह व उनकी पत्नी अल्पना सिंह संग जनपद स्तरीय उड़ान प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करने वाली छात्रा सविता भारती उनकी शिक्षक मंजू सिंह व अभिभावक रमेश चंद्र, छात्रा रूमा देवी शिक्षक अनामिका कटिहार अभिभावक अंबिका प्रसाद, छात्रा सारिका वर्मा शिक्षक संतोष वर्मा अभिभावक रामसागर व छात्र आयुष, शिक्षक नेता बाजपेई, अभिभावक अर्चना समेत स्कूल ऑफ द वीक अभियान में चुने गए प्रथम विद्यालय के परिषदीय विद्यालय रतसिया के प्रधानाध्यापक प्रमोद वर्मा ने शिरकत की।

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सदा -ए -मोबीन ❤️✍️ दहेजऔरउसका_निवारण (रोकना)…दुनिया के सभी मुल्कों की तरक्की उसमें रहने बसने वाले इंसानों की तरक्की पर निर्भर करती है हर मुल्क में भिन्न-भिन्न जाति समूह के लोग पाए जाते हैं और सभी जातियों की अपनी अपनी संस्कृति और परंपरा होती है, आज के दौर में दहेज लगभग सभी जातियों में विद्यमान एक परंपरा है, आधुनिक दौर में उन सभी स्थापित परंपराओं को खत्म करना अति आवश्यक है जो एक प्रजातंत्रात्मक देश में समानता के सिद्धांत को प्रभावित करती हैं तथा समाज व देश की तरक्की में बाधक बनती हैं!दहेज प्रथा इसमें एक प्रमुख बाधा है इसे रोकने के लिए संसद ने 1961 में दहेज प्रतिषेध अधिनियम बनाया, अफसोस कि वह किताबों से निकलकर धरातल पर पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया यानी नागरिकों ने उस पर पूरी तरह से अमल नहीं किया!दहेज का मतलब किसी मूल्यवान प्रतिभूति से है यह हमारे समाज की एक अहम कुरीति के रूप में उभरती चली आ रही है, इस पे जिन पढ़े-लिखे, संपन्न और प्रतिष्ठित लोगों को रोक लगाना चाहिए वही इसका प्रदर्शन कर बढ़ावा दे रहे हैं, जिसका बुरा असर गरीबों पर पड़ता है उन्हें इससे मानसिक, भावनात्मक और असमानता जैसी प्रवृति का शिकार होना पड़ता है और अपनी लड़कियों को बोझ समझने लगते हैं!इसके कारण देश में औसतन हर एक घंटे में एक महिला दहेज संबंधी कारणों से मौत का शिकार होती है, दहेज के कारण ही घरेलू हिंसा, महिला उत्पीड़न, आईपीसी 498 A, मारपीट, सीआरपीसी 125, तीन तलाक, आदि अपराध होते हैं, लोग अदालतों के चक्कर लगाकर हजारों रुपए व कीमती समय बर्बाद करते हैं और सरकारी मशीनरी के प्रयोग से देश पर आर्थिक बोझ पड़ता है!अगर सभी जातियों के पढ़े-लिखे, समाज व देश हित में सोचने वाले लोग इस प्रथा को खत्म करने के लिए अपने समाज से इस्लाही तहरीक (सुधार आंदोलन) शुरू कर दें तो यह पूरी तरह खत्म हो जाएगी!हमने अपने साथियों के साथ अपनी गद्दी (गाज़ी) बिरादरी से इस कुरीति को खत्म करने की तहरीक शुरू कर दी है!भारत के विभिन्न राज्यों में गद्दी बिरादरी के लोग रहते हैं हर क्षेत्र में किसी न किसी रूप में दहेज का चलन है हमारे समाज में अधिक दहेज की मांग करना, भारी-भरकम बारात ले जाना, तरह तरह का खाना बनवाना, बड़े-बड़े भौकाली लोगों को दावत देने को लोग अपनी प्रतिष्ठा समझते हैं! हम किसी से कम नहीं की भावना में जीने वाले हमारे गद्दी भाइयों यह सोच हमारी बिरादरी, समाज और देश की तरक्की में बाधक है!और तो और बहुत से पढ़े-लिखे हमारे नौजवान साथी यह सोच बना लेते हैं कि पढ़ लिख कर जब हमें नौकरी मिल जाएगी तो किसी पैसे वाले परिवार से हमारा रिश्ता होगा खूब दहेज मिलेगा और बहुत हसीन बीवी, यानी पढ़े-लिखे और नौकरी पेशा लड़कों में दहेज की इच्छा चार गुना बढ़ जाती है, और लड़की वाले भी यह सोच बना लेते हैं कि लड़का नौकरी वाला या पैसे वाला ही हो दहेज चाहे जितना देना पड़ जाए, मेरे गद्दी भाइयों यह सोच गलत है क्योंकि लालच में किया गया निकाह गलत है!मेरे गद्दी भाइयों हमारा दीन इस्लाम है और हमारे आदर्श हजरत मोहम्मद स. हैं, हमें अपने दीन और अपने आदर्श के बताए हुए रास्ते पर चलना है!हुजूर से शादी हजरत बीबी खदीजा रजि. ने इसलिए नहीं किया था कि वह कोई सरकारी हाकिम है या बहुत बड़े व्यापारी या जमींदार या किसी सियासी ओहदे पर हैं, बल्कि इसलिए किया था कि उनके अख्लाक, आदत, किरदार, व्यवहार, ईमानदारी, सादगी और सच्चाई की कोई मिसाल नहीं!मेरे नौजवान साथियों धन, दौलत, पद, प्रतिष्ठा हासिल करो मगर इसकी वजह से निकाह में विलंब ना करो और यह मिल जाने पर दहेज का लालच ना करो, तुम्हारा पद, दौलत तो लोगों को ही पसंद आएगी, लेकिन उसके साथ सादगी पसंद नेक इंसान बनो जो खुदा को पसंद आएगा!हम अपने ऑल इंडिया गद्दी समाज फेडरेशन के सभी अविवाहित नौजवान साथियों से गुजारिश करते हैं कि संकल्प लो कि हम अपनी शादी में बिल्कुल दहेज नहीं लेंगे दोस्तों अगर तुम्हीं इस पर अमल नहीं करोगे तो बिरादरी इस पर अमल कैसे करेगी, हुजूर साहब हर बात पर पहले खुद प्रैक्टिकल करते थे तब समाज के लोग मानते थे लिहाजा आप लोग इस पर अमल करने की मेहरबानी करें, दोस्तों त्याग अल्लाह को बहुत पसंद है, दहेज का त्याग करो!बिहार,उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश आदि के संगठन से जुड़े हमारे नौजवान साथी भी इस पर अमल करें और संकल्प लें!हुजूर ने अपनी बेटी की शादी में गृहस्ती की 9 चीजे दी थी और चंद खास लोगों को दावत दी थी,वो भी मेहर के पैस से!.. इस्लाम में बारात का भी कोई जिक्र नहीं है बारात को भी बाईकाट करें.. हम तो इसे लुटेरों का गैंग कहते हैं!हम लोग हुजूर की सुन्नत पर अमल करें निकाह में अपने चंद खास रिश्तेदारों व दोस्तों को ही ले जाएं ताकि लड़की वाले पर खाना देने का दबाव खत्म हो जाए!इस्लाम के मुताबिक निकाह में लड़की पक्ष का खर्च न के बराबर है वलीमा आदि लड़के वाले को करना चाहिए!मेरे गद्दी समाज के लोगों हमें अपने दीन पर मजबूती से अमल करना चाहिए, सुन्नत व हदीस के मुताबिक ही शादी करना चाहिए!