माइक्रोप्लान के अनुसार टीकाकरण सत्रों का करें आयोजन, मोबिलाइज़ेशन भी जरूरी

नियमित टीकाकरण के माइक्रोप्लान के नवीनीकरण के बारे में विस्तार से दी जानकारी

वाराणसी, 23 मई 2022 । बच्चों व गर्भवती के नियमित टीकाकरण कार्यक्रम को सुदृढ़ करने और इसके माइक्रोप्लान को समय से तैयार कर टीकाकरण सत्रों का संचालन सफलतापूर्वक किया जा सकता है जिससे जनपद में नियमित टीकाकरण की सौ फीसदी उपलब्धि हासिल की जा सके। इसके लिए जरूरी है आबादी के अनुसार संबन्धित क्षेत्र का सर्वे करना, आशा कार्यकर्ता द्वारा हेड काउंट सर्वे कर ड्यू लिस्ट तैयार करना, माइक्रोप्लान तैयार करना, कोल्ड चेन पॉइंट की व्यवस्था की जाँच, टीकाकरण सत्र के लिए वैक्सीन की पर्याप्त मात्रा की उपलब्धता सुनिश्चित करना एवं समुदाय को मोबिलाइज कर टीकाकरण सत्र का संचालन करना। यह बातें मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ संदीप चौधरी ने सोमवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) सभागार में आयोजित नियमित टीकाकरण के माइक्रोप्लान के नवीनीकरण पर प्रशिक्षण कार्यशाला में कहीं।
सीएमओ ने कहा कि माइक्रोप्लान से जुड़ी जितनी भी समस्या हैं, उनको पूर्ण रूप से दूर कर ली जाएँ। सभी ग्रामीण व शहरी पीएचसी एवं सीएचसी के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी समस्त स्टाफ के साथ विस्तार से चर्चा करें। सीएमओ ने प्रशिक्षण में मौजूद समस्त चिकित्सा अधिकारियों, एचईओ, बीपीएम और बीसीपीएम से कहा कि कार्यशाला में दी गयी जानकारी का उचित अनुपालन करें। इसके साथ ही उन्होने कहा कि 2 जून तक नया एवं अपडेटेड माइक्रोप्लान भेजना सुनिश्चित करें।
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी (डीआईओ) डॉ वीएस राय ने जनपद के सभी ब्लॉक स्तरीय प्रभारी चिकित्साधिकारियों (एमओआईसी), स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी (एचईओ), ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर (बीपीएम), ब्लॉक सामुदायिक प्रक्रिया प्रबन्धक (बीसीपीएम) एवं ब्लॉक टीकाकरण अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया। उन्हें वर्ष 2022-23 के नियमित टीकाकरण के माइक्रोप्लान के नवीनीकरण के बारे में विस्तार से बताया । नियमित टीकाकरण, कोल्ड चेन पॉइंट रख-रखाव, वैक्सीन की पर्याप्त उपलब्धता, ई-विन पोर्टल पर वैक्सीन की सूचना नियमित रूप से अपडेट करते रहने, टीकाकरण के प्रतिकूल प्रभावों आदि के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होने बताया कि नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के तहत वर्ष 2022-23 के लिए सौ फीसदी उपलब्धि का लक्ष्य निर्धारित किया गया है जिसकी शत-प्रतिशत उपलब्धि हासिल करने की योजना तैयार की गई है। मॉनिटरिंग का कार्य डब्ल्यूएचओ और यूनिसेफ द्वारा किया जाएगा।
पांचों शहरी सीएचसी बनेंगे कोल्ड चेन पॉइंट – एसीएमओ डॉ एके मौर्य ने कहा कि नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के तहत शहरी क्षेत्र में कोल्ड चेन पॉइंट व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए जनपद के सभी पांचों शहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों को कोल्ड चेन पॉइंट बनाया जाएगा। एक कोल्ड चेन पॉइंट से 5 से 6 शहरी पीएचसी को जोड़ा जाएगा जिससे वैक्सीन कि उपलब्धता निरंतर बनी रहे और शीघ्र-अतिशीघ्र वैक्सीन सत्र स्थल व आशा कार्यकर्ताओं तक पहुंचाई जा सके। इसके साथ ही उन्होने कहा कि शहरी क्षेत्र में टीकाकरण सत्रों का आयोजन सार्वजनिक स्थलों या आंगनबाड़ी केंद्र पर करें जिससे बच्चों व गर्भवती को आसानी से सत्र तक ले जया जा सके और टीकाकरण कराया जा सके।
इस दौरान डबल्यूएचओ एसएमओ डॉ जयशीलन एवं डॉ सतरुपा ने माइक्रोप्लान को कैसे विकसित करें और टीकाकरण सत्र का आयोजन किस तरह से किया जाए, के बारे में विस्तार से जानकारी दी। यूनीसेफ के क्षेत्रीय समन्वयक प्रदीप विश्वकर्मा एवं डीएमसी डॉ शाहिद ने सामुदायिक मोबिलाइज़ेशन और प्रतिभागिता के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
कार्यशाला में उप जिला प्रतिरक्षण अधिकारी (डिप्टी डीआईओ) डॉ सुरेश सिंह, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ एके पांडे, समस्त एमओआईसी, डॉ कार्तिकेय सिंह, डीएचईआईओ हरिवंश यादव, डिप्टी डीएचईआईओ कल्पना सिंह व उषा ओझा, जिला नगरीय स्वास्थ्य समन्वयक आशीष सिंह, डब्ल्यूएचओ से डॉ जयशीलन व डॉ सतरुपा, यूनीसेफ के डॉ प्रदीप विश्वकर्मा और डॉ शाहिद, एचईओ, बीपीएम, बीसीपीएम एवं अन्य चिकित्सक, अधिकारी व स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे

*वाराणसी से ब्यूरो चीफ प्रियंका पटेल*

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सदा -ए -मोबीन ❤️✍️ दहेजऔरउसका_निवारण (रोकना)…दुनिया के सभी मुल्कों की तरक्की उसमें रहने बसने वाले इंसानों की तरक्की पर निर्भर करती है हर मुल्क में भिन्न-भिन्न जाति समूह के लोग पाए जाते हैं और सभी जातियों की अपनी अपनी संस्कृति और परंपरा होती है, आज के दौर में दहेज लगभग सभी जातियों में विद्यमान एक परंपरा है, आधुनिक दौर में उन सभी स्थापित परंपराओं को खत्म करना अति आवश्यक है जो एक प्रजातंत्रात्मक देश में समानता के सिद्धांत को प्रभावित करती हैं तथा समाज व देश की तरक्की में बाधक बनती हैं!दहेज प्रथा इसमें एक प्रमुख बाधा है इसे रोकने के लिए संसद ने 1961 में दहेज प्रतिषेध अधिनियम बनाया, अफसोस कि वह किताबों से निकलकर धरातल पर पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया यानी नागरिकों ने उस पर पूरी तरह से अमल नहीं किया!दहेज का मतलब किसी मूल्यवान प्रतिभूति से है यह हमारे समाज की एक अहम कुरीति के रूप में उभरती चली आ रही है, इस पे जिन पढ़े-लिखे, संपन्न और प्रतिष्ठित लोगों को रोक लगाना चाहिए वही इसका प्रदर्शन कर बढ़ावा दे रहे हैं, जिसका बुरा असर गरीबों पर पड़ता है उन्हें इससे मानसिक, भावनात्मक और असमानता जैसी प्रवृति का शिकार होना पड़ता है और अपनी लड़कियों को बोझ समझने लगते हैं!इसके कारण देश में औसतन हर एक घंटे में एक महिला दहेज संबंधी कारणों से मौत का शिकार होती है, दहेज के कारण ही घरेलू हिंसा, महिला उत्पीड़न, आईपीसी 498 A, मारपीट, सीआरपीसी 125, तीन तलाक, आदि अपराध होते हैं, लोग अदालतों के चक्कर लगाकर हजारों रुपए व कीमती समय बर्बाद करते हैं और सरकारी मशीनरी के प्रयोग से देश पर आर्थिक बोझ पड़ता है!अगर सभी जातियों के पढ़े-लिखे, समाज व देश हित में सोचने वाले लोग इस प्रथा को खत्म करने के लिए अपने समाज से इस्लाही तहरीक (सुधार आंदोलन) शुरू कर दें तो यह पूरी तरह खत्म हो जाएगी!हमने अपने साथियों के साथ अपनी गद्दी (गाज़ी) बिरादरी से इस कुरीति को खत्म करने की तहरीक शुरू कर दी है!भारत के विभिन्न राज्यों में गद्दी बिरादरी के लोग रहते हैं हर क्षेत्र में किसी न किसी रूप में दहेज का चलन है हमारे समाज में अधिक दहेज की मांग करना, भारी-भरकम बारात ले जाना, तरह तरह का खाना बनवाना, बड़े-बड़े भौकाली लोगों को दावत देने को लोग अपनी प्रतिष्ठा समझते हैं! हम किसी से कम नहीं की भावना में जीने वाले हमारे गद्दी भाइयों यह सोच हमारी बिरादरी, समाज और देश की तरक्की में बाधक है!और तो और बहुत से पढ़े-लिखे हमारे नौजवान साथी यह सोच बना लेते हैं कि पढ़ लिख कर जब हमें नौकरी मिल जाएगी तो किसी पैसे वाले परिवार से हमारा रिश्ता होगा खूब दहेज मिलेगा और बहुत हसीन बीवी, यानी पढ़े-लिखे और नौकरी पेशा लड़कों में दहेज की इच्छा चार गुना बढ़ जाती है, और लड़की वाले भी यह सोच बना लेते हैं कि लड़का नौकरी वाला या पैसे वाला ही हो दहेज चाहे जितना देना पड़ जाए, मेरे गद्दी भाइयों यह सोच गलत है क्योंकि लालच में किया गया निकाह गलत है!मेरे गद्दी भाइयों हमारा दीन इस्लाम है और हमारे आदर्श हजरत मोहम्मद स. हैं, हमें अपने दीन और अपने आदर्श के बताए हुए रास्ते पर चलना है!हुजूर से शादी हजरत बीबी खदीजा रजि. ने इसलिए नहीं किया था कि वह कोई सरकारी हाकिम है या बहुत बड़े व्यापारी या जमींदार या किसी सियासी ओहदे पर हैं, बल्कि इसलिए किया था कि उनके अख्लाक, आदत, किरदार, व्यवहार, ईमानदारी, सादगी और सच्चाई की कोई मिसाल नहीं!मेरे नौजवान साथियों धन, दौलत, पद, प्रतिष्ठा हासिल करो मगर इसकी वजह से निकाह में विलंब ना करो और यह मिल जाने पर दहेज का लालच ना करो, तुम्हारा पद, दौलत तो लोगों को ही पसंद आएगी, लेकिन उसके साथ सादगी पसंद नेक इंसान बनो जो खुदा को पसंद आएगा!हम अपने ऑल इंडिया गद्दी समाज फेडरेशन के सभी अविवाहित नौजवान साथियों से गुजारिश करते हैं कि संकल्प लो कि हम अपनी शादी में बिल्कुल दहेज नहीं लेंगे दोस्तों अगर तुम्हीं इस पर अमल नहीं करोगे तो बिरादरी इस पर अमल कैसे करेगी, हुजूर साहब हर बात पर पहले खुद प्रैक्टिकल करते थे तब समाज के लोग मानते थे लिहाजा आप लोग इस पर अमल करने की मेहरबानी करें, दोस्तों त्याग अल्लाह को बहुत पसंद है, दहेज का त्याग करो!बिहार,उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश आदि के संगठन से जुड़े हमारे नौजवान साथी भी इस पर अमल करें और संकल्प लें!हुजूर ने अपनी बेटी की शादी में गृहस्ती की 9 चीजे दी थी और चंद खास लोगों को दावत दी थी,वो भी मेहर के पैस से!.. इस्लाम में बारात का भी कोई जिक्र नहीं है बारात को भी बाईकाट करें.. हम तो इसे लुटेरों का गैंग कहते हैं!हम लोग हुजूर की सुन्नत पर अमल करें निकाह में अपने चंद खास रिश्तेदारों व दोस्तों को ही ले जाएं ताकि लड़की वाले पर खाना देने का दबाव खत्म हो जाए!इस्लाम के मुताबिक निकाह में लड़की पक्ष का खर्च न के बराबर है वलीमा आदि लड़के वाले को करना चाहिए!मेरे गद्दी समाज के लोगों हमें अपने दीन पर मजबूती से अमल करना चाहिए, सुन्नत व हदीस के मुताबिक ही शादी करना चाहिए!