रिपोर्ट- विशाल सिंह सैदपुर
उक्त शौचालय के बीते 2 सालों से बंद होने के चलते आमजन को उसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। जिससे लोग सड़क किनारे या खेतों में खुले में शौच करने को विवश हैं और इससे सरकार की खुले में शौचमुक्त भारत का सपना टूटता दिखाई दे रहा है। शौचालय के बंद होने के विरोध में सोमवार को ग्रामीणों ने शौचालय के सामने प्रदर्शन किया और नारेबाजी की।

सोमवार की सुबह 11 बजे ग्रामीण शौचालय के सामने जुटे और नारेबाजी करने लगे। गांव की सुनीता, विनोद कुमार आदि ने बताया कि यहां पर बना हुआ शौचालय बीते 2 सालों से नहीं खुलता है। जिसके चलते हमें इसका लाभ नहीं मिल पाता। बताया कि यहां पर लगा हुआ सफाईकर्मी इसे बंद कर गायब है और आता नहीं है। वहीं गांव में भी सफाई को लेकर कहा कि गांव में भी गंदगी का अंबार है लेकिन जिम्मेदार इससे बेखबर हैं।

कहा कि सरकार लाखों रूपए खर्च कर शौचालय बनवाती है और यहां इसकी देखरेख के लिए भी एक कर्मी को रखकर उसे वेतन दिया जाता है, इसके बावजूद वो शौचालय पर आकर इसे खोलने की बजाय घर बैठकर वेतन लेता है। इससे सरकार की खुले में शौचमुक्त भारत की मंशा भी फेल होती दिख रही है। मांग किया कि इसे नियमित रूप से खुलवाया जाए और गांव में सफाईकर्मी आकर सफाई करें।
