गोला गोकरण नाथ खीरी।
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कानपुर द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केंद्र, जमुनाबाद, लखीमपुर खीरी द्वारा आज वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम के अंतर्गत वृक्षारोपण कराया गया जिसमें केंद्र के अध्यक्ष डॉ० एस के विश्वकर्मा के नेत्तृत्व में साप्ताहिक वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन कराया गया। केंद्र के उद्यान वैज्ञानिक डॉ मोहम्मद सोहेल ने अमरूद, कैथा, आंवला, कटहल, हरण, बहेड़, बेल, जामुन, बड़हल के पौधों के लगाने और उनके महत्व के विषय में चर्चा किया। केंद्र के कृषि प्रसार वैज्ञानिक डॉ० जिया लाल गुप्ता ने पर्यावरण सुरक्षा के लिए वृक्षारोपण के महत्व के विषय में विस्तार पूर्वक जानकारी दी और कहा कि पर्यावरण में संतुलन बनाए रखने के लिए ज्यादा से ज्यादा वृक्षों के रोपण को लगाने के लिए प्रोत्साहित किया। फसल वैज्ञानिक डॉ० प्रदीप कुमार बिसेन ने वन वृक्षों के विषय में और उनकी प्रजातियों के विषय में विस्तार पूर्वक जानकारी दी।

मुख्य रूप से सागौन, पॉपुलर, नीम, बकेन, पीपल, ढाक, यूकेलिप्टस इत्यादि वन वृक्षों के रोपण के विषय में जानकारी दी तथा ज्यादा से ज्यादा संख्या में रोपित करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे कम से कम अपने खेत के मेड़ों पर जरूर वृक्ष लगाए जिससे कि उनकी आमदनी में इजाफा हो और वह नारा साबित हो, हर खेत में मेड और पेड़ पर पेड़ तथा एक पेड़ मां के नाम नारे के उद्देश्य को पूरा किया जा सके। इन वृक्षों को चारों तरफ सुरक्षा घेरा बनाने तथा इसके आसपास उगने वाले तमाम खरपतवारों को रोकने तथा उनके प्रबंधन के विषय में भी जानकारी दी। डॉ० एन के त्रिपाठी ने उन वृक्षों के विषय में जानकारी दी जो कि जानवरों को चारे में उपयोग किए जाते हैं विशेष कर सूबबूल, पीपल, करंज, गूलर, पाकर इत्यादि, उन्होंने कहा कि जिस समय चारे की कमी होती है विशेष करके ग्रीष्म काल में इनकी पत्तियों का प्रयोग चारे के रूप में किया जा सकता है जिससे पशु पालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए पशु उत्पादन लागत को कम किया जा सकता है, उन्होंने यह भी बताया कि वृक्षों की पत्तियां जहां गिरती हैं वहां जीवांश पदार्थ की मात्रा बढ़ जाती है जिससे अच्छा उत्पादन लिया जा सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *