तोहरे बिन बाबू जी मन तरसे।
हमरे नयनवा से जल बरसे।।

केशव बाबू जी रहलन गरीब वन के मसीहा।
शिक्षा, दीक्षा जरूरी चाही बतवलन मसीहा।।
सत्य सनातन के रहले बाबू जी सच्चा पुजारी।
हितैषी बनके गरीबवन को खूब स्नेह दिया।।
याद करे सब लोग तो नयन बरसे
हमरे नयनवा =============

बाबूजी के बखान सब केहू करेलन।
राम बहादुर सिंह जब चर्चा करेलन।।
बहु नीलम सिंह बाबू जी के सपना सजा वे।
बाबा के याद में सिद्धार्थ बाबू गमगीन रहलेन।
श्रृद्धांजलि चढ़ावें त नयन बरसे।
हमरे नयनवा से जल ========

अंग्रेजी के अख़बार पढ़ें नित्य रोज सबेरे।
शिक्षा संस्कार चाही कहे बाबू जी अरमां बिखेरे।।
आज ज्ञानशिखा समाचार पत्र बिखेरे ल उजाला।
गरीब, मजदूर के गली गली के समाचार उकेरे।।
न्याय दिलावे ला सब जन के
हमरे नयनवा से ============

खिलल रहे जलज जब निकले सुरजवा।
ज्ञानदीप खुलल शिक्षा अंग्रेजी स्कूलवा।।
ईहै सपनवा बाबू केशव प्रसाद जी के रहल।
बाबू राम बहादुर जी खिलाए दीहले फुलवा।।
अँगनवा में खुशी खुशी कली हरसे।
हमरे नयनवा से।

बाबू केशव सिंह की पुण्यतिथि पर
डाक्टर लियाकत अली जलज द्वारा रचित गीत ।

तोहरे बिन बाबू जी मन तरसे।
हमरे नयनवा से जल बरसे।।

केशव बाबू जी रहलन गरीब वन के मसीहा।
शिक्षा, दीक्षा जरूरी चाही बतवलन मसीहा।।
सत्य सनातन के रहले बाबू जी सच्चा पुजारी।
हितैषी बनके गरीबवन को खूब स्नेह दिया।।
याद करे सब लोग तो नयन बरसे
हमरे नयनवा =============

बाबूजी के बखान सब केहू करेलन।
राम बहादुर सिंह जब चर्चा करेलन।।
बहु नीलम सिंह बाबू जी के सपना सजा वे।
बाबा के याद में सिद्धार्थ बाबू गमगीन रहलेन।
श्रृद्धांजलि चढ़ावें त नयन बरसे।
हमरे नयनवा से जल ========

अंग्रेजी के अख़बार पढ़ें नित्य रोज सबेरे।
शिक्षा संस्कार चाही कहे बाबू जी अरमां बिखेरे।।
आज ज्ञानशिखा समाचार पत्र बिखेरे ल उजाला।
गरीब, मजदूर के गली गली के समाचार उकेरे।।
न्याय दिलावे ला सब जन के
हमरे नयनवा से ============

खिलल रहे जलज जब निकले सुरजवा।
ज्ञानदीप खुलल शिक्षा अंग्रेजी स्कूलवा।।
ईहै सपनवा बाबू केशव प्रसाद जी के रहल।
बाबू राम बहादुर जी खिलाए दीहले फुलवा।।
अँगनवा में खुशी खुशी कली हरसे।
हमरे नयनवा से।

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