पटरंगा थाना क्षेत्र में प्रतिबंधित फलदार वृक्षों की खुलेआम अवैध कटान ने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि स्थानीय प्रशासन, वन विभाग और उद्यान विभाग की सहमति से नियमों को रौंदते हुए हरे-भरे पेड़ों का सफाया किया जा रहा है।

ताज़ा मामला वाजिदपुर गांव का है, जहां बिना ज़मीनी सत्यापन और पारदर्शी प्रक्रिया के पेड़ों की कटान कराई गई।

सबसे चौंकाने वाला खुलासा
कटान की अनुमति से जुड़े दस्तावेज़ों पर आज भी जनपद का नाम फैजाबाद दर्ज है—
जबकि 2018 में ही जिले का नाम अयोध्या हो चुका है।
तो सवाल यह है—
पुराने कागज़, पुराने नाम और पुराने सिस्टम के सहारे किसे बचाया जा रहा है?

एसडीएम रुदौली संतोष कुमार ने मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन तो दिया है,
लेकिन ज़मीनी सच्चाई यह है कि—

जिस विभाग को पेड़ों की रक्षा करनी थी, वही ठेकेदारों को कटान के आदेश थमा रहा है!
पर्यावरण संरक्षण सिर्फ फाइलों तक सिमट कर रह गया है!

अब सवाल सिर्फ कटे पेड़ों का नहीं है—
सवाल सिस्टम की नीयत, मिलीभगत और जिम्मेदारी से भागने की आदत का है।

क्या होगी ठोस कार्रवाई या फिर यह मामला भी
फाइलों में दबा दिया जाएगा?

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