सेवा में,
कुलपति महोदय, (प्रतिलिपि: मुख्यमंत्री कार्यालय, उत्तर प्रदेश एवं जिला प्रशासन, लखनऊ)
लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ।
जिलाधिकारी लखनऊ प्रशासन
विषय: 1. परिसर स्थित लाल बारादरी में नमाज अदायगी पर रोक और छात्रों के संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण के संबंध में।
- लखनऊ विश्वविद्यालय के इतिहास में मुस्लिम योगदान, लाल बारादरी स्थित प्राचीन इबादतगाह की सुरक्षा और रमजान के दौरान नमाज की अनुमति के संबंध में।
आदरणीय महोदय/महोदया,
बहुआयामी दल की ओर से हम, लखनऊ विश्वविद्यालय के सजग छात्र और नागरिक, परिसर की ऐतिहासिक लाल बारादरी इमारत के पास मुस्लिम छात्रों को नमाज पढ़ने से रोके जाने और प्रशासन द्वारा की गई हालिया घेराबंदी (बैरिकेडिंग) के संबंध में यह ज्ञापन प्रस्तुत कर रहे हैं। हम इस ज्ञापन के माध्यम से आपका ध्यान विश्वविद्यालय की साझा विरासत और वर्तमान में उत्पन्न हुए संवेदनशील मुद्दों की ओर आकर्षित करना चाहते हैं:
लखनऊ विश्वविद्यालय की स्थापना में राजा सर मोहम्मद अली मोहम्मद खान (महमूदाबाद के राजा) का अतुलनीय योगदान रहा है। उन्होंने न केवल विश्वविद्यालय की स्थापना का विचार रखा, बल्कि इसके लिए महत्वपूर्ण आर्थिक और वैचारिक समर्थन भी प्रदान किया। विश्वविद्यालय का अरबी और फारसी विभाग भारत के सबसे पुराने विभागों में से एक है, जहाँ शम्स-उल-उलेमा मौलवी कमालुद्दीन अहमद और प्रोफेसर वाहिद मिर्जा जैसे विद्वानों ने शिक्षा की ज्योति जलाई।
लाल बारादरी का महत्व: विश्वविद्यालय परिसर में स्थित लाल बारादरी नवाबी काल की एक ऐतिहासिक धरोहर है, जिसका निर्माण नवाब गाजी-उद-दीन हैदर के समय हुआ था। छात्रों और स्थानीय समुदाय का दावा है कि इसके एक हिस्से में लगभग 200 वर्षों से मस्जिद मौजूद है, जहाँ पारंपरिक रूप से नमाज अदा की जाती रही है। वर्तमान में, प्रशासन द्वारा “संरचनात्मक सुरक्षा” और “मरम्मत” का हवाला देते हुए लाल बारादरी को सील कर दिया गया है। रमजान के पवित्र महीने के दौरान इस स्थान को बंद किए जाने से मुस्लिम छात्रों में गहरा असंतोष है। हाल ही में, मुस्लिम छात्रों द्वारा बाहर नमाज पढ़ने और उनके समर्थन में हिंदू छात्रों द्वारा सुरक्षा घेरा बनाने की घटनाओं ने विश्वविद्यालय की ‘गंगा-जमुनी तहजीब’ को तो प्रदर्शित किया है, लेकिन प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल भी खड़े किए हैं।
- धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 25 प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म को मानने, आचरण करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता देता है।
लाल बारादरी में दशकों से चली आ रही नमाज की परंपरा को अचानक बिना पूर्व सूचना के रोकना इस मौलिक अधिकार का उल्लंघन प्रतीत होता है। - सुरक्षा बनाम आस्था: प्रशासन द्वारा इमारत के “जर्जर” होने का हवाला दिया गया है, किंतु छात्रों का तर्क है कि यदि ढांचा असुरक्षित है, तो परिसर में ही किसी वैकल्पिक स्थान पर नमाज की अनुमति दी जानी चाहिए, न कि इसे पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाए।
- गंगा-जमुनी तहजीब का संरक्षण: हालिया घटनाओं में जिस तरह से हिंदू छात्रों ने मुस्लिम सहपाठियों के लिए ‘ह्यूमन चेन’ (मानव श्रृंखला) बनाकर उनकी सुरक्षा की, वह विश्वविद्यालय की गौरवशाली साझा संस्कृति का प्रतीक है। प्रशासन को चाहिए कि वह राजनीति से ऊपर उठकर इस सांप्रदायिक सौहार्द को बढ़ावा दे, न कि विवाद को गहरा करे।
- संवैधानिक निष्पक्षता: विश्वविद्यालय एक धर्मनिरपेक्ष शैक्षणिक संस्थान है। संविधान का अनुच्छेद 28 शैक्षणिक संस्थानों में धार्मिक निर्देशों को विनियमित करता है, किंतु किसी भी समुदाय को उनकी व्यक्तिगत प्रार्थना से वंचित करना समावेशी शिक्षा के सिद्धांतों के विरुद्ध है।
- राजनीतिक परिप्रेक्ष्य: वर्तमान योगी सरकार प्रदेश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को पुनर्जीवित करने पर जोर दे रही है। हमारा आग्रह है कि इस ‘पुनरुद्धार’ में लखनऊ की मिली-जुली संस्कृति (Islamicate culture) को भी शामिल किया जाए। ऐतिहासिक मस्जिदों और इबादतगाहों को “विवाद” के बजाय “विरासत” के रूप में संरक्षित किया जाना चाहिए।
बहुआयामी दल की ओर से हमारी माँगें:
• लाल बारादरी में स्थित मस्जिद को नमाज के लिए तुरंत खोला जाए, विशेषकर रमजान के दौरान छात्रों को इबादत की अनुमति दी जाए।
• विश्वविद्यालय के संस्थापक सदस्यों, विशेषकर राजा महमूदाबाद के योगदान को परिसर के भीतर उचित सम्मान और स्थान दिया जाए।
• धरोहरों के संरक्षण के नाम पर किसी भी समुदाय की धार्मिक भावनाओं और वर्षों से चली आ रही परंपराओं को बाधित न किया जाए।
• लाल बारादरी या उसके समीप सुरक्षित स्थान पर छात्रों को शांतिपूर्वक नमाज पढ़ने की अनुमति पुनः बहाल की जाए।
• धार्मिक आधार पर छात्रों के बीच भेदभाव करने वाली किसी भी बाहरी राजनीतिक दखलंदाजी को परिसर से दूर रखा जाए।
• प्रदर्शनकारी छात्रों पर की जा रही दंडात्मक कार्यवाही या कानूनी नोटिसों को तुरंत वापस लिया जाए, क्योंकि वे केवल अपने अधिकारों की मांग कर रहे थे।
हम आशा करते हैं कि प्रशासन शैक्षणिक वातावरण की गरिमा और आपसी सौहार्द को बनाए रखने के लिए न्यायपूर्ण निर्णय लेगा। कि विश्वविद्यालय प्रशासन न्यायोचित निर्णय लेते हुए परिसर में शांति और सौहार्द का माहौल बनाए रखेगा।

