रिपोर्ट नसरुद्दीन अंसारी
लखीमपुर खीरी।मितौली क्षेत्र की ग्राम पंचायत भीखमपुर में होलिका पूजन को आए लोग मायूस होकर वापस लौटे ।
ब्राह्मण बाहुल्य गांव में लोगों का कहना है जिम्मेदारों ने होलिका को गड़ाया नहीं तो जले कैसे?30 वर्षों से जिम्मेदार लोग ना होली रखवाते हैं ना ही जलवाते हैं। इस बार तिथि पर होलिका गड़ाई (स्थापना) ही नहीं कराई गई।
बच्चे होली की जगह में उपले डालकर होली जलाते हैं।
जिम्मेदार और प्रशासन की ओर से भीखमपुर में होली मजाक बनकर रह गई।
जिम्मेदार रुचि नहीं न लेने के चलते केवल छोटे बच्चे अपने अपने घरों से उपले लाकर रख देते हैं और आग लगाकर ताप लेते हैं फिर जिम्मेदार आकर पूजन और तापकर चले जाते।
इस बार वो भी नहीं हुआ फुलहरी दूज पर गड़ने वाली होली तिथि पर गड़ाई नहीं गई केवल बच्चों ने एकदिन पहले कुछ उपले और ईंधन डाल दिया था।
भीखमपुर ग्राम पंचायत में जिम्मेदार की उदासीनता के चलते होली के त्यौहार पर ना तो साफ सफाई हुई और कई
नालियां चोक पड़ी है, और कई नल खराब पड़े हुए हैं।
शहीद राज नारायण मिश्रा जी का गांव बना अपेक्षाओं का शिकार।

