अगर गेंद 150 की रफ्तार से निकलेगी तो बल्लेबाज की सांसे अटकेंगी। इसी सोच के साथ उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन यानी UPCA ने शनिवार को इकाना स्टेडियम में ‘यूपी स्पीड हंट’ लखनऊ मंडल के ट्रायल आयोजित किये। जिसमें लखनऊ मंडल के अंतर्गत आने वाले अभ्यर्थियों के ट्रायल लिये गये।नतीजा? पूरा प्रदेश इकाना में उतर आया।

लखनऊ से उन्नाव, रायबरेली से सीतापुर और बाराबंकी से आगरा तक। UPCA के इस ऐलान के बाद प्रदेश के हर जिले का तेज गेंदबाज इकाना पहुंच गया।

सुबह 6 बजे से ही स्टेडियम के गेट पर लाइन लग गई। हाथ में किटबैग, आंखों में टीम इंडिया का सपना। किसी के पास स्पाइक नए थे, तो किसी के जूते घिसे हुए, पर जुनून सबका एक था। ‘सर, बस एक बार स्पीड गन पर दिखा दीजिए’।

UPCA ने साफ कहा था, यह ट्रायल सिर्फ फास्ट बॉलरों के लिए है। यहां डिग्री नहीं, सिर्फ गति देखी जाएगी।

राडार गन लगी, कोच खड़े थे, और हर गेंदबाज को 6-6 गेंद का मौका मिला। 135 प्लस छुआ तो सेलेक्टर की नजर उठी। 140 प्लस टच किया तो नोटबुक खुल गई।

UPCA अधिकारी के मुताबिक, “हम बुमराह नहीं बना रहे, हम बुमराह को खोज रहे हैं। यूपी में टैलेंट की कमी नहीं, प्लेटफॉर्म की कमी थी।”

गांव से आया 19 साल का लड़का हो या कानपुर का क्लब क्रिकेटर, सबके लिए इकाना का मैदान एक जैसा था।

एक अभ्यर्थी ने कहा, “साहब, बस का 800 रुपये का टिकट काट के आया हूं। अगर 138 भी निकाल दी तो घरवालों का कर्ज उतर जाएगा।”

यही यूपी स्पीड हंट की सबसे बड़ी जीत है। इसने क्रिकेट को सिर्फ लखनऊ-कानपुर तक सीमित नहीं रखा।

UPCA अब शॉर्टलिस्ट हुए तेज गेंदबाजों को हाई परफॉर्मेंस कैंप में बुलाएगा। वहां बायोमैकेनिक्स, फिटनेस और लाइन-लेंथ पर काम होगा। मकसद साफ है, अगले दो साल में यूपी से तीन इंटरनेशनल पेसर निकालना।

ट्रॉफी बाद में आती है। पहले रास्ता बनता है। UPCA ने रास्ता बना दिया है। अब गेंदबाजों की बारी है 22 गज पर धमाका करने की।

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