देवीपाटन मंडल (श्रावस्ती)-समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव मसूद आलम ख़ान ने विधानसभा श्रावस्ती के भ्रमण के दौरान कहा कि श्रावस्ती आज भी जीवन की मूलभूत सुविधाओं से कोसों दूर है। न रोजगार के पर्याप्त अवसर हैं, न उद्योग, न अच्छे स्कूल और न ही बेहतर अस्पताल। जिले में न बस अड्डा है, न रेलवे की सुविधा। जर्जर सड़कें और बदहाल विद्युत व्यवस्था श्रावस्ती की पहचान बन चुकी हैं।

उन्होंने कहा कि विकास के मानकों पर श्रावस्ती प्रदेश के सबसे पिछड़े जिलों में 75वें स्थान पर है। इसके लिए भाजपा के विधायक और प्रदेश की भाजपा सरकार पूरी तरह जिम्मेदार हैं। लंबे समय से सत्ता में रहने के बावजूद श्रावस्ती की तस्वीर नहीं बदली। मसूद आलम ख़ान ने कहा कि श्रावस्ती की जनता अब सब कुछ देख और समझ रही है। 2027 के विधानसभा चुनाव में जनता अपने वोट की ताकत से भाजपा को करारा जवाब देगी और बदलाव का रास्ता तैयार करेगी। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर श्रावस्ती को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, परिवहन और उद्योग के क्षेत्र में ठोस काम किया जाएगा।

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मेधावी बच्चों की आंखों में दिखे सपने, अपने कल को हराकर आगे बढ़ो, कामयाबी ख़ुद कदम चूमेगी : फैसल लालासेंट मैरी स्कूल स्वार में मेधावी छात्र-छात्राओं का सम्मान, प्रमाण-पत्र देकर बढ़ाया हौसलाएमडी न्यूज़ बहुआयामी समाचार पत्र एवं न्यूज़ चैनलन्यूज़ चैनललोकेशन रामपुरजिला रिपोर्टर यूसुफ की रिपोर्टस्वार। सेंट मैरी स्कूल में उस वक़्त माहौल भावुक हो गया जब मेधावी छात्र-छात्राओं को उनकी शानदार शैक्षणिक उपलब्धियों पर प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। बच्चों के चेहरों पर खुशी, आंखों में चमक और भविष्य के बड़े सपने साफ़ दिखाई दे रहे थे। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता एवं तालीम तरबियत वैलफेयर सोसाइटी के प्रबंधक फ़ैसल ख़ान लाला मौजूद रहे।बच्चों को मुबारकबाद देते हुए फ़ैसल ख़ान लाला ने बेहद भावुक अंदाज़ में कहा कि बच्चों की कामयाबी सिर्फ़ एक प्रमाण-पत्र नहीं होती बल्कि उस प्रमाण-पत्र के पीछे मां-बाप की उम्मीदें, शिक्षकों और बच्चे की मेहनत छिपी होती है, मेरे प्यारे बच्चो ज़िंदगी में कभी अपनी बराबरी किसी दूसरे बच्चे से मत करना हो सकता है कोई आपसे आगे हो और कोई आपसे पीछे लेकिन असली मुक़ाबला किसी और से नहीं बल्कि ख़ुद अपने आप से है अपने बीते हुए कल को देखिए और ख़ुद से पूछिए कि आज मैं कल से कितना बेहतर हूँ अगर आज का बच्चा अपने बीते हुए कल से बेहतर बनने की कोशिश करता है तो उसे दुनिया की किसी दौड़ में पीछे रहने का डर नहीं होता है ।याद रखिए आपके मां-बाप की आंखों में आपके लिए जो ख़्वाब हैं उन्हें हक़ीक़त में बदलने की ज़िम्मेदारी भी आपकी है। जब आप कामयाब होंगे तो सबसे पहले आपके मां-बाप की आंखों में खुशी के आंसू होंगे और वही आपके जीवन का सबसे बड़ा इनाम होगा। बच्चों को सिर्फ़ अच्छे नंबर हासिल करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें अच्छा इंसान बनने की कोशिश करनी चाहिए।किताबें आपको इम्तिहान पास करना सिखाती हैं लेकिन तालीम आपको ज़िंदगी जीना सिखाती है इसलिए इल्म हासिल कीजिए, अदब सीखिए, अपने बुज़ुर्गों की इज़्ज़त कीजिए और उन लोगों के लिए आसानियां पैदा कीजिए जिन्हें आपकी मदद की ज़रूरत है।आज के ये बच्चे ही कल के डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक, अफ़सर, समाजसेवी और देश के ज़िम्मेदार नागरिक बनेंगे। इसलिए इनकी हौसला-अफ़ज़ाई करना सिर्फ़ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आने वाले बेहतर समाज की बुनियाद मज़बूत करना है।