रिपोटर पवन कुमार md न्यूज़ तहसील लखीमपुर

लखीमपुर खीरी। थाना शारदानगर क्षेत्र में गुरुवार सुबह करीब 8 बजे बाघ ने एक गाय पर हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया। घटना सिरसी और नकहिया गांव के बीच कपिल मास्टर के पॉपलर के खेत के पास हुई। बाघ की मौजूदगी की खबर से पूरे इलाके में दहशत फैल गई है।
गाय की मौत के बाद ग्रामीणों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल अपनी और अपने मवेशियों की सुरक्षा का खड़ा हो गया है। खेतों के आसपास बाघ की दस्तक से ग्रामीण सहमे हुए हैं और लोगों को खेतों में जाने तक में डर लग रहा है।
वन विभाग की तैयारी पर सवालिया निशान!
घटना के बाद वन विभाग की टीम मौके पर मौजूद है, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि बाघ को पकड़ने या उसकी गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी के लिए मौके पर अभी तक पिंजरा नहीं लगाया गया है और न ही उसकी लोकेशन ट्रेस करने के लिए कोई पुख्ता इंतजाम दिखाई दे रहे हैं।
ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या वन विभाग किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है?
अगर बाघ खेतों से निकलकर आबादी की ओर बढ़ गया और किसी ग्रामीण या बच्चे को निशाना बना लिया तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? ग्रामीणों का कहना है कि केवल मौके पर टीम की मौजूदगी पर्याप्त नहीं है, बल्कि बाघ की लोकेशन तत्काल ट्रेस कर उसे आबादी से दूर रखने के ठोस इंतजाम किए जाने चाहिए।
ग्रामीणों का सीधा सवाल—आखिर कब जागेगा वन विभाग?
एक मवेशी की जान जा चुकी है। अब ग्रामीणों को डर है कि कहीं अगला निशाना इंसान न बन जाए। ग्रामीणों ने वन विभाग से तत्काल कैमरा ट्रैप लगाने, बाघ की लोकेशन ट्रेस करने, आवश्यकतानुसार पिंजरा लगाने और आबादी की ओर उसकी आवाजाही रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई की मांग की है।
गाय की मौत के बाद भी अगर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए तो सवाल सिर्फ एक मवेशी की मौत का नहीं रहेगा, बल्कि ग्रामीणों की सुरक्षा का होगा।
बड़ा सवाल:
👉 क्या वन विभाग किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है?
👉 बाघ की लोकेशन ट्रेस करने के लिए तत्काल क्या कदम उठाए गए?
👉 आबादी में बाघ घुसा तो ग्रामीणों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा?
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