फतेहपुर। करीब दो दशक पुराने गैर इरादतन हत्या के मामले में अदालत ने चार अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। एडीजे-2 की अदालत ने प्रत्येक दोषी पर 25-25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। यह फैसला पुलिस की प्रभावी पैरवी और मजबूत साक्ष्यों के आधार पर आया।मामला थाना थरियांव क्षेत्र के सलेमपुर गांव का है। पुलिस के अनुसार वर्ष 2004 में वादी की तहरीर पर मु0अ0सं0 88ए/04 दर्ज किया गया था। मुकदमे में नुरुल हसन पुत्र तहरूद्दीन, सोहराब पुत्र रशीद, इमदाद पुत्र फिरजुद्दीन और वहाज पुत्र गरीबुद्दीन को आरोपी बनाया गया था। इनके खिलाफ धारा 304, 149, 148, 147 और 504 भादवि के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था।विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। इसके बाद ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत मामले की लगातार मॉनिटरिंग की गई। पुलिस के मुताबिक वैज्ञानिक विवेचना, साक्ष्यों के प्रभावी संकलन और अभियोजन की मजबूत पैरवी के चलते अभियुक्तों को दोषसिद्ध कराने में सफलता मिली।17 अगस्त 2026 को एडीजे-2 की अदालत ने फैसला सुनाते हुए चारों अभियुक्तों को दोषी करार दिया। अदालत ने प्रत्येक को 10 वर्ष के सश्रम कारावास और 25 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।पुलिस के अनुसार अभियोजन पक्ष की ओर से प्रभावी पैरवी अभियोजक प्रमिल श्रीवास्तव ने की। मामले की मॉनिटरिंग निरीक्षक श्रवण कुमार सिंह के नेतृत्व में की गई। विवेचक उपनिरीक्षक कल्पनाथ चौधरी, पैरोकार कांस्टेबल सुरेंद्र, कोर्ट मुहर्रिर महिला आरक्षी श्वेता पटेल सहित उपनिरीक्षक अश्विनी वर्मा, कांस्टेबल रोहित राजावत, जितेंद्र सिंह और विवेक कुमार की भूमिका रही।पुलिस का कहना है कि ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत पुराने मामलों में प्रभावी पैरवी और साक्ष्यों के आधार पर दोषियों को सजा दिलाने की कार्रवाई लगातार जारी है।

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