बाराबंकी रामनगर तहसील के गणेशपुर क्षेत्रों में रिलायंस जियो (Reliance Jio) की फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस (FWA) सेवा JioAirFiber पूरी तरह लचर साबित हो रही है। महीने में 15 दिन यहां पर एयर फाइबर सेवा पूरी तरह ध्वस्त रहती है उपभोक्ताओं के जवाब से बचने के लिए कंपनी ने एआई आधारित कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव बैठा रखा है शहरों में हाई-स्पीड इंटरनेट का दावा करने वाली यह 5G आधारित सेवा गांवों तक पहुंचते-पहुंचते हांफने लगी है। नेटवर्क की अनिश्चितता, बार-बार सिग्नल गायब होने और बेहद धीमी स्पीड के कारण ग्रामीण उपभोक्ता ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
5G तकनीक पर आधारित होने के बावजूद ग्रामीण इलाकों में एयरफाइबर 10 Mbps की स्पीड देने में भी नाकाम साबित हो रहा है। दिन में कई-कई घंटों तक लाल बत्ती नो सर्विस जलती रहती है।
मौसम का प्रभाव: मामूली बारिश या बादलों के छाते ही डिवाइस का सिग्नल पूरी तरह गायब हो जाता है। ऑप्टिकल फाइबर के बजाय वायरलेस तकनीक पर निर्भरता ग्रामीण मौसम के अनुकूल साबित नहीं हो पा रही है।
काम-काज और पढ़ाई प्रभावित: वर्क फ्रॉम होम कर रहे युवाओं, ऑनलाइन पढ़ाई करने वाले छात्रों और जन सेवा केंद्रों (CSC) का काम पूरी तरह ठप हो चुका है। बैंकिंग और डिजिटल भुगतान सेवाओं में भी भारी व्यवधान आ रहा है।
शिकायतों के बावजूद स्थानीय तकनीशियन और कस्टमर केयर टीम कोई ठोस समाधान नहीं निकाल पा रही हैं। कनेक्शन लगाने के बाद सर्विस रिस्पॉन्स टाइम बेहद निराशाजनक है।
ग्रामीण ग्राहकों का कहना है कि 5G एयरफाइबर का कनेक्शन लेते समय बड़े-बड़े वादे किए गए थे और एडवांस रीचार्ज भी लिया गया था। लेकिन अब कनेक्शन शो-पीस बनकर रह गया है। कई क्षेत्रों में लोग कनेक्शन कटवाकर पारंपरिक ब्रॉडबैंड या अन्य विकल्पों की ओर रुख करने को मजबूर हैं।
यदि जियो ने जल्द ही अपने ग्रामीण 5G टावरों के इंफ्रास्ट्रक्चर और बैंडविड्थ में सुधार नहीं किया, तो ग्रामीण भारत में डिजिटल इंडिया का यह सपना महज एक कागजी दावा बनकर रह जाएगा।
जिला संवाददाता रामानंद सागर

