
तिब्बती चिकित्सा पद्धति पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी शुरू
वाराणसी। केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान, सारनाथ में केंद्रीय तिब्बती चिकित्सा परिषद एवं केंद्रीय तिब्बती प्रशासन, धर्मशाला के संयुक्त तत्वावधान में तिब्बती चिकित्सा पद्धति पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुक्रवार को शुभारंभ हुआ। मुख्य अतिथि केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. कॉलदेन पेमाछो ने कहा कि सोवा-रिग्पा उपचार का विज्ञान है, जो शरीर, मन और प्रकृति के संतुलन पर आधारित है। इसमें हिमालयी जड़ी-बूटियों, खनिजों एवं प्राकृतिक औषधियों का उपयोग किया जाता है।
केंद्रीय तिब्बती चिकित्सा परिषद के अध्यक्ष डॉ. थुपतेन कुनफेल ने कहा कि सम्मेलन में देशभर के विद्वान तिब्बती चिकित्सा के सिद्धांत और नैदानिक अभ्यास पर अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। मुख्य वक्ता पद्मश्री डॉ. पद्मा गुरुमित ने तिब्बती चिकित्सा के प्रामाणिक ग्रंथ ‘ग्युशी’ (चार तंत्र) की महत्ता बताई। अध्यक्षता करते हुए संस्थान के कुलपति प्रो. वांगचुक दोर्जे नेगी ने कहा कि तिब्बती चिकित्सा प्राचीन परंपरा के साथ आधुनिक समय में भी उपयोगी उपचार पद्धति है।
संगोष्ठी में 140 प्रतिभागी शामिल हुए हैं, जबकि देशभर से चयनित 11 सदस्य अपने शोधपत्र प्रस्तुत करेंगे। स्वागत प्रो. दोर्जे दमदुल तथा धन्यवाद डॉ. टाशी दावा ने किया। उद्घाटन तिब्बती आध्यात्मिक परंपरा एवं मंत्रोच्चारण के साथ हुआ।
