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प्रयागराज। इलाहाबाद जन कल्याण समिति के अध्यक्ष मोहम्मद हंजला ने पासपोर्ट नवीनीकरण के दौरान आपराधिक इतिहास के नाम पर आवेदकों को परेशान किए जाने का मुद्दा उठाया है। उन्होंने कहा कि कई मामलों में थाना स्तर से पुलिस सत्यापन रिपोर्ट यह कहकर रोक दी जाती है कि पहले संबंधित मुकदमे का न्यायालयीन आदेश या एनओसी लेकर आएं।
हंजला ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के Mahesh Kumar Agarwal v. Union of India (19 दिसंबर 2025) तथा Vangala Kasturi Rangacharyulu v. CBI जैसे फैसलों में पासपोर्ट नवीनीकरण और लंबित आपराधिक मामलों के संबंध में महत्वपूर्ण कानूनी स्थिति स्पष्ट की गई है। वहीं इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी Pawan Kumar Rajbhar v. Union of India (19 जनवरी 2024) मामले में इस विषय पर विचार किया है।
हंजला के अनुसार, केवल FIR या आपराधिक इतिहास होने मात्र से हर मामले में पासपोर्ट नवीनीकरण स्वतः प्रतिबंधित नहीं हो जाता। संबंधित मामले में Passport Act, 1967 की धारा 6(2)(f), GSR 570(E) तथा न्यायालय के आदेश के आधार पर निर्णय होना चाहिए।
उन्होंने पुलिस आयुक्त प्रयागराज से मांग की कि थानों को स्पष्ट निर्देश दिए जाएं कि सत्यापन रिपोर्ट अनावश्यक रूप से लंबित न रखी जाए। यदि किसी मामले में न्यायालय का आदेश या एनओसी आवश्यक है तो आवेदक को उसका स्पष्ट कानूनी आधार बताया जाए। हंजला ने कहा कि समिति की मांग किसी आरोपी को विशेष लाभ देने की नहीं, बल्कि कानून के अनुरूप पारदर्शी और समयबद्ध पासपोर्ट सत्यापन व्यवस्था सुनिश्चित कराने की है।
