रिपोर्ट _ मोहम्मद अशफाक *लखीमपुर खीरी।*

जनपद के विकासखंड लखीमपुर और कुंभी गोला के सरकारी एवं सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में सुरक्षा व्यवस्था को परखने के लिए जोखिम मूल्यांकन कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसके तहत 10 सितंबर से शुरू हुए अभियान में 10 अक्टूबर तक 70 से अधिक कंपोजिट विद्यालयों का सुरक्षा ऑडिट पूरा किए जाने की जानकारी सामने आई है। अभियान के प्रथम चरण में कंपोजिट सरकारी विद्यालयों की सुरक्षा व्यवस्था का आकलन किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान कई विद्यालयों में सुरक्षा संबंधी कमियां मिलने की बात कही जा रही है।तीन विशेषज्ञों की टीम कर रही संयुक्त निरीक्षणविद्यालयों के सुरक्षा ऑडिट की जिम्मेदारी एक निजी कंपनी को सौंपी गई है। कंपनी की प्रशिक्षित टीम में सिविल इंजीनियर, अग्नि सुरक्षा विशेषज्ञ और आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ शामिल हैं। तीनों विशेषज्ञ संयुक्त रूप से विद्यालय भवन, अग्नि सुरक्षा व्यवस्था और आपदा से निपटने की तैयारियों का मूल्यांकन कर रहे हैं। निरीक्षण के दौरान फोटो सहित आवश्यक साक्ष्य और जानकारियां मोबाइल ऐप पर दर्ज की जा रही हैं, ताकि सुरक्षा से संबंधित कमियों का रिकॉर्ड तैयार किया जा सके। 400 बिंदुओं पर हो रहा जोखिम का आकलनऑडिट के दौरान विद्यालयों में छात्र-छात्राओं और शिक्षकों की संख्या, पेयजल के लिए नल एवं हैंडपंप, शौचालय, दिव्यांग शौचालय, अग्निशमन यंत्रों की उपलब्धता और उनकी नियमित रिफिलिंग से संबंधित जानकारी जुटाई जा रही है। इसके साथ ही विद्यालय के संसाधन मानचित्र, खतरा मानचित्र और निकासी मानचित्र के आधार पर आपातकालीन तैयारियों की जांच की जा रही है।सिविल इंजीनियर विद्यालय भवन की संरचना, निर्माण वर्ष और मौजूदा स्थिति के आधार पर संभावित जोखिमों का आकलन कर रहे हैं। वहीं, अग्नि सुरक्षा विशेषज्ञ आग लगने अथवा अन्य आपात स्थिति में उपलब्ध संसाधनों की जांच कर रहे हैं। विद्यालय परिसर में मौजूद असुरक्षित स्थानों को चिह्नित कर ऐप पर दर्ज किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में लगभग 400 बिंदुओं पर मूल्यांकन किया जा रहा है। खुली वायरिंग और छतों की स्थिति बनी चिंतासुरक्षा ऑडिट के दौरान कुछ विद्यालयों में अग्नि सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं में कमियां सामने आने की बात कही जा रही है। अग्नि सुरक्षा विशेषज्ञ के अनुसार, कुछ विद्यालयों में रेत से भरी बाल्टियों की व्यवस्था और अग्निशमन यंत्रों की सुरक्षित उपलब्धता को लेकर कमियां देखी गई हैं। इसके अलावा कुछ विद्यालयों की छतों की स्थिति, खुली वायरिंग और लटकते बिजली के तार भी चिंता का विषय हैं। इन स्थितियों से विद्यार्थियों और विद्यालय के कर्मचारियों की सुरक्षा प्रभावित होने की आशंका है।विद्यालय प्रबंधन की ओर से कुछ मामलों में इन समस्याओं की जानकारी उच्चाधिकारियों को दिए जाने की बात कही गई है। हालांकि, सामने आई कमियों को दूर करने के लिए संबंधित विद्यालयों में क्या कार्रवाई की गई है, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है। शिक्षकों और विद्यार्थियों को भी दिया जा रहा प्रशिक्षणजोखिम मूल्यांकन कार्यक्रम के अंतर्गत विशेषज्ञ विद्यालय के स्टाफ और छात्र-छात्राओं को आपदा के दौरान सुरक्षित बचाव, त्वरित प्रतिक्रिया और प्रभावी प्रबंधन के संबंध में प्रशिक्षण भी दे रहे हैं। इसका उद्देश्य आपात स्थिति में घबराहट से बचते हुए सुरक्षित निकासी और राहत संबंधी उपायों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।जनपद के परियोजना प्रबंधक संदीप कुमार वर्मा ने बताया कि विद्यालयों में जोखिम मूल्यांकन का कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम की निगरानी उच्च न्यायालय और संबंधित उच्चाधिकारियों के स्तर से की जा रही है।अब महत्वपूर्ण सवाल यह है कि सुरक्षा ऑडिट में चिह्नित कमियों को दूर करने के लिए संबंधित विभाग कितनी तेजी से कदम उठाते हैं, ताकि विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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By MD News

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