
दीनदयाल हस्तकला संकुल में सजी सुरों और लोककलाओं की महफिल, 800 तक दर्शकों की रही सहभागिता
कथक, सितार, लोकनृत्य, रैप और गजल की प्रस्तुतियों ने बांधा समां, स्थानीय कलाकारों को मंच और पहचान देने की पहल
वाराणसी। कार्यालय विकास आयुक्त (हस्तशिल्प), वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार की पहल और ‘मेरा शहर’ के संयुक्त तत्वावधान में दीनदयाल हस्तकला संकुल (टीएफसी), वाराणसी में भव्य सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने किया। इस अवसर पर टीएफसी के सहायक निदेशक प्रद्युम्न पांडेय ने उनका स्वागत किया। सांस्कृतिक संध्या में करीब 700 से 800 लोगों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम में कथक, सितार वादन, रैप, हिप-हॉप, लोकनृत्य, शायरी और संगीत की विविध प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। ‘धुन-ए-बनारस’ बैंड ने गजल, भजन और बॉलीवुड फ्यूजन के जरिए काशी की समृद्ध संगीत परंपरा को आधुनिक अंदाज में प्रस्तुत किया। सुरों और कलाओं के इस संगम ने दर्शकों को काशी की सांस्कृतिक विविधता से रूबरू कराया। इस दौरान कला, संस्कृति, शिक्षा, समाज और मीडिया के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली विशिष्ट विभूतियों को सम्मानित भी किया गया।
‘मेरा शहर’ की संस्थापक सोनल उपाध्याय और साक्षी मिश्रा के प्रयासों से आयोजित इस पहल का उद्देश्य स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए मंच उपलब्ध कराने के साथ उन्हें पहचान और रोजगार के अवसर प्रदान करना है। आयोजन में कलाकारों की सहभागिता निःशुल्क रखी गई, ताकि आर्थिक सीमाएं उनकी प्रतिभा और कला की राह में बाधा न बनें।
यह सांस्कृतिक संध्या स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और काशी की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बनी। कार्यक्रम का समापन सोनल उपाध्याय के आभार ज्ञापन के साथ हुआ।
