विश्व थाइराइड दिवस पर ऑन लाइन गूगल मीट व व्हाट्सएप ग्रुप के मध्यम से ” मानव स्वास्थ्य और थाइरॉइड का महत्व” महिलाओं के विशेष संदर्भ में’ विषय पर वेबगोष्ठी का आयोजन किया गया। आज दिनाँक- 25.05.2022 को गिन्दो देवी महिला महाविद्यालय बदायूँ की आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ(आई० क्यू०ए० सी०) के तत्वावधान में प्राचार्या डॉ वंदना शर्मा के संरक्षण एवं निर्देशन में व मिशन शक्ति प्रभारी असिस्टेंट प्रोफेसर सरला देवी चक्रवर्ती के संयोजन एवं नेतृत्व में चलाए जा रहे में चलाए जा रहें “मिशन शक्ति विशेष अभियान” के तहत आज “विश्व थायराइड दिवस पर ” वेब गोष्ठी का आयोजन किया गया। वेब गोष्ठी का शुभारंभ महाविद्यालय के प्रबंध समिति के सचिव गौरव रस्तोगी के मुख्य आतिथ्य में व प्राचार्या डॉ वंदना शर्मा की अध्यक्षता में किया गया। छात्राओं को संबोधित करते हुए प्राचार्या डॉ वंदना शर्मा ने कहा कि मनुष्य के जीवन में स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण स्थान है स्वास्थ व्यक्ति की अमूल्य निधि है यह केवल व्यक्ति विशेष को ही नहीं प्रभावित करता बल्कि जिस समाज में रहता है उस संपूर्ण समाज को प्रभावित करता है स्वस्थ मनुष्य ही सामाजिक उत्तरदायित्व को कुशलतापूर्वक निर्वाह कर सकता है।

मुख्य अतिथि गौरव रस्तोगी प्रबन्धक महाविद्यालय प्रबंध समिति ने छात्राओं को जागरूक करते हुए बताया कि हमारे देश में 4 करोड़ से ज्यादा लोग थायराइड से पीड़ित हैं महिलाओं के इसके शिकार होने की आशंका पुरुषों से चार गुना ज्यादा होती है, पर समस्या यह है कि अधिकांश को पता ही नहीं होता कि उन्हें थायरॉइड है। उन्होंने बताया कि इसके लक्षण धीरे-धीरे असर दिखाते हैं, इसलिए पहचान में भी समय लग जाता है। शुरुआती स्तर पर ही इसे पहचानने और काबू में रखने के लिए नियमित जांच जरूरी है। मुख्य वक्ता डॉ० निशी अवस्थी ने छात्राओं को योग और संतुलित जीवनशैली अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि थायरॉइड के मरीजों को नियमित रूप से योग और व्यायाम करना चाहिए। इससे थायरॉइड ग्रंथि सुचारू रूप से काम करना शुरू कर देती है। हाइपोथायरॉइड एवं हाइपरथायरॉइड दोनों ही स्थितियों में इसका असर सकारात्मक पड़ता है। कार्यक्रम संयोजिका मिशन शक्ति प्रभारी असिस्टेंट प्रोफेसर सरला देवी चक्रवर्ती ने विस्तार पूर्वक मानव स्वास्थ्य एवं थायरॉइड के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आज की व्यस्ततम जीवन शैली में तनाव व असंतुलित खान पान मानव जीवन के अंग बन गए हैं। ऐसे में स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही अनेक बीमारियों का कारण है।

थायरॉइड भी उनमें से एक हैं। थायरॉयड एक बड़ी ग्रंथि है जो पुरुषों और महिलाओं दोनों के गले में स्थित होती है। थायराइड विकास को नियंत्रित करता है, हार्मोन के निकलने, और एक मानव शरीर की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इससे वजन बढ़ने, थकान एवं अवसाद जैसी स्थितियों देखने को मिलती है।संतुलित खान-पान और व्यायाम से इसे पूरी तरह काबू किया जा सकता है। इस अवसर पर छात्रा पलक वर्मा, अर्चना भारती, शालिनी सागर, राजकुमारी, मेघा, आदि छात्राओं ने अपने विचार रखें।कार्यक्रम का संयोजन एवं संचालन मिशन शक्ति प्रभारी असिस्टेंट प्रोफेसर सरला चक्रवर्ती ने किया।

✍️ ब्यूरो रिपोर्ट आलोक मालपाणी (बरेली मंडल)

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सदा -ए -मोबीन ❤️✍️ दहेजऔरउसका_निवारण (रोकना)…दुनिया के सभी मुल्कों की तरक्की उसमें रहने बसने वाले इंसानों की तरक्की पर निर्भर करती है हर मुल्क में भिन्न-भिन्न जाति समूह के लोग पाए जाते हैं और सभी जातियों की अपनी अपनी संस्कृति और परंपरा होती है, आज के दौर में दहेज लगभग सभी जातियों में विद्यमान एक परंपरा है, आधुनिक दौर में उन सभी स्थापित परंपराओं को खत्म करना अति आवश्यक है जो एक प्रजातंत्रात्मक देश में समानता के सिद्धांत को प्रभावित करती हैं तथा समाज व देश की तरक्की में बाधक बनती हैं!दहेज प्रथा इसमें एक प्रमुख बाधा है इसे रोकने के लिए संसद ने 1961 में दहेज प्रतिषेध अधिनियम बनाया, अफसोस कि वह किताबों से निकलकर धरातल पर पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया यानी नागरिकों ने उस पर पूरी तरह से अमल नहीं किया!दहेज का मतलब किसी मूल्यवान प्रतिभूति से है यह हमारे समाज की एक अहम कुरीति के रूप में उभरती चली आ रही है, इस पे जिन पढ़े-लिखे, संपन्न और प्रतिष्ठित लोगों को रोक लगाना चाहिए वही इसका प्रदर्शन कर बढ़ावा दे रहे हैं, जिसका बुरा असर गरीबों पर पड़ता है उन्हें इससे मानसिक, भावनात्मक और असमानता जैसी प्रवृति का शिकार होना पड़ता है और अपनी लड़कियों को बोझ समझने लगते हैं!इसके कारण देश में औसतन हर एक घंटे में एक महिला दहेज संबंधी कारणों से मौत का शिकार होती है, दहेज के कारण ही घरेलू हिंसा, महिला उत्पीड़न, आईपीसी 498 A, मारपीट, सीआरपीसी 125, तीन तलाक, आदि अपराध होते हैं, लोग अदालतों के चक्कर लगाकर हजारों रुपए व कीमती समय बर्बाद करते हैं और सरकारी मशीनरी के प्रयोग से देश पर आर्थिक बोझ पड़ता है!अगर सभी जातियों के पढ़े-लिखे, समाज व देश हित में सोचने वाले लोग इस प्रथा को खत्म करने के लिए अपने समाज से इस्लाही तहरीक (सुधार आंदोलन) शुरू कर दें तो यह पूरी तरह खत्म हो जाएगी!हमने अपने साथियों के साथ अपनी गद्दी (गाज़ी) बिरादरी से इस कुरीति को खत्म करने की तहरीक शुरू कर दी है!भारत के विभिन्न राज्यों में गद्दी बिरादरी के लोग रहते हैं हर क्षेत्र में किसी न किसी रूप में दहेज का चलन है हमारे समाज में अधिक दहेज की मांग करना, भारी-भरकम बारात ले जाना, तरह तरह का खाना बनवाना, बड़े-बड़े भौकाली लोगों को दावत देने को लोग अपनी प्रतिष्ठा समझते हैं! हम किसी से कम नहीं की भावना में जीने वाले हमारे गद्दी भाइयों यह सोच हमारी बिरादरी, समाज और देश की तरक्की में बाधक है!और तो और बहुत से पढ़े-लिखे हमारे नौजवान साथी यह सोच बना लेते हैं कि पढ़ लिख कर जब हमें नौकरी मिल जाएगी तो किसी पैसे वाले परिवार से हमारा रिश्ता होगा खूब दहेज मिलेगा और बहुत हसीन बीवी, यानी पढ़े-लिखे और नौकरी पेशा लड़कों में दहेज की इच्छा चार गुना बढ़ जाती है, और लड़की वाले भी यह सोच बना लेते हैं कि लड़का नौकरी वाला या पैसे वाला ही हो दहेज चाहे जितना देना पड़ जाए, मेरे गद्दी भाइयों यह सोच गलत है क्योंकि लालच में किया गया निकाह गलत है!मेरे गद्दी भाइयों हमारा दीन इस्लाम है और हमारे आदर्श हजरत मोहम्मद स. हैं, हमें अपने दीन और अपने आदर्श के बताए हुए रास्ते पर चलना है!हुजूर से शादी हजरत बीबी खदीजा रजि. ने इसलिए नहीं किया था कि वह कोई सरकारी हाकिम है या बहुत बड़े व्यापारी या जमींदार या किसी सियासी ओहदे पर हैं, बल्कि इसलिए किया था कि उनके अख्लाक, आदत, किरदार, व्यवहार, ईमानदारी, सादगी और सच्चाई की कोई मिसाल नहीं!मेरे नौजवान साथियों धन, दौलत, पद, प्रतिष्ठा हासिल करो मगर इसकी वजह से निकाह में विलंब ना करो और यह मिल जाने पर दहेज का लालच ना करो, तुम्हारा पद, दौलत तो लोगों को ही पसंद आएगी, लेकिन उसके साथ सादगी पसंद नेक इंसान बनो जो खुदा को पसंद आएगा!हम अपने ऑल इंडिया गद्दी समाज फेडरेशन के सभी अविवाहित नौजवान साथियों से गुजारिश करते हैं कि संकल्प लो कि हम अपनी शादी में बिल्कुल दहेज नहीं लेंगे दोस्तों अगर तुम्हीं इस पर अमल नहीं करोगे तो बिरादरी इस पर अमल कैसे करेगी, हुजूर साहब हर बात पर पहले खुद प्रैक्टिकल करते थे तब समाज के लोग मानते थे लिहाजा आप लोग इस पर अमल करने की मेहरबानी करें, दोस्तों त्याग अल्लाह को बहुत पसंद है, दहेज का त्याग करो!बिहार,उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश आदि के संगठन से जुड़े हमारे नौजवान साथी भी इस पर अमल करें और संकल्प लें!हुजूर ने अपनी बेटी की शादी में गृहस्ती की 9 चीजे दी थी और चंद खास लोगों को दावत दी थी,वो भी मेहर के पैस से!.. इस्लाम में बारात का भी कोई जिक्र नहीं है बारात को भी बाईकाट करें.. हम तो इसे लुटेरों का गैंग कहते हैं!हम लोग हुजूर की सुन्नत पर अमल करें निकाह में अपने चंद खास रिश्तेदारों व दोस्तों को ही ले जाएं ताकि लड़की वाले पर खाना देने का दबाव खत्म हो जाए!इस्लाम के मुताबिक निकाह में लड़की पक्ष का खर्च न के बराबर है वलीमा आदि लड़के वाले को करना चाहिए!मेरे गद्दी समाज के लोगों हमें अपने दीन पर मजबूती से अमल करना चाहिए, सुन्नत व हदीस के मुताबिक ही शादी करना चाहिए!