तपती गर्मी और धूप पर आस्था भारी: तपती गर्मी और धूप पर आस्था भारी बृज 84 कोस की परिक्रमा में उमड़ा जनसैलाब भक्तिमय हुआ माहौल,

मल मास (अधिक मास) के महापर्व पर ब्रज चौरासी कोस की परिक्रमा में श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़ पड़ा है। 45-46 डिग्री सेल्सियस के भीषण तापमान और तपती धूप के बावजूद लाखों भक्त इस ऐतिहासिक परिक्रमा में शामिल हो रहे हैं, जिससे पूरा माहौल भक्तिमय हो गया है।

यह परिक्रमा श्री धाम शेषसाई, बरका, बुखरारी, धानौता, रूपनगर, फूलगडी, शेरनगर, मझोई होते हुए शेरगढ़ और यमुना पार निकल जाती है। इन रास्तों पर परिक्रमार्थियों की भारी भीड़ देखी जा रही है, जिससे सड़कें खचाखच भरी हुई हैं। ग्रामीण किशन प्रधान ने जानकारी देते हुए बताया कि प्राचीन परिक्रमा का वास्तविक स्वरूप इसी मार्ग से होकर गुजरता है, और सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु इसका अनुसरण करते हैं। बहुत बहुत दूर यानि कि राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, बिहार, झारखंड, आदि राज्यों से परिक्रमार्थि परिक्रमा करने आते हैं।

जिला पंचायत सदस्य प्रत्याशी नरवीर नेता जी ने बताया कि भीषण गर्मी और 45-46 डिग्री तापमान के बावजूद ब्रज की ऐतिहासिक 84 कोस परिक्रमा में श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़ा है। भक्त भीषण धूप में भी “राधे-राधे” के जयकारे लगाते हुए नंगे पैर यात्रा कर रहे हैं। श्री हरवान प्रधान जी ने भी पुष्टि की कि 46 डिग्री तक तापमान पहुँचने और गर्म हवाओं के बावजूद परिक्रमार्थियों की आस्था में कोई कमी नहीं आई है।

दोपहर के समय श्रद्धालु मंदिरों, आश्रमों और धर्मशालाओं में विश्राम कर रहे हैं। सामाजिक संस्थाएं और स्वयंसेवी जगह-जगह पानी की प्याऊ, शीतल जल, नींबू पानी और भंडारे की व्यवस्था कर रहे हैं। बृजमोहन पुजारी और झाड़ू मुकदम ने परिक्रमा करने वालों के लिए जल की व्यवस्था करते हुए नल भी लगवाया है।

श्री महेन्द्र बौहरे जी ने परिक्रमा के धार्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पुराणों के अनुसार, पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) में परिक्रमा करने से प्रत्येक कदम पर अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य प्राप्त होता है।

डॉक्टर दुर्गपाल वैध जी ने परिक्रमा के दौरान भीषण गर्मी में स्वास्थ्य को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।

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