भय का माहौल नहीं रहना चाहिए- रजनी तिवारी ने पुलिस को दिए निर्देश

MD news Hardoi by Puneet Shukla

शाहाबाद तहसील क्षेत्र के परियल गांव में एसडीएम सुशील मिश्रा पर हमले, पुलिस की बदले की कार्रवाई और बच्ची की मौत को लेकर चल रहे विवाद के बीच बुधवार शाम क्षेत्रीय विधायक एवं मंत्री रजनी तिवारी गांव पहुंचीं। उनके साथ भाजपा जिलाध्यक्ष अजीत सिंह बब्बन भी थे। मंत्री ने जिला पंचायत सदस्य लालाराम राजपूत के घर पहुंचकर उनकी प्रधान पत्नी और पुलिस कार्रवाई में चोटिल दो महिलाओं का हालचाल लिया। साथ ही राममोहन की बेटी रूबी की मृत्यु पर परिवार को ढांढस बंधाते हुए संवेदना व्यक्त की।

मंत्री ने ग्रामीणों से कहा, सब एक परिवार हैं और स्थिति जो भी रहे, मिलजुल कर रहना है। अपनी ओर से गलती नहीं करनी है। उन्होंने मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि गांव में भय का वातावरण नहीं रहना चाहिए। इस दौरान डिप्टी एसपी हरियावां अजीत सिंह चौहान और शाहाबाद कोतवाल भी मौजूद रहे।


बड़े भाई कहते थे, पता नहीं कौन सी खता हो गई हमसे: लालाराम

वहीं, जिला पंचायत सदस्य लालाराम राजपूत ने ब्लॉक प्रमुख त्रिपुरेश मिश्रा के दावों से अलग बयान देकर मामले को नया मोड़ दे दिया। उन्होंने कहा, वो (प्रमुख) तो हमेशा बड़े भाई-बड़े भाई कहते रहते थे, पता नहीं कौन सी गलती कर दी हमने जो ये दिन दिखा दिया। लालाराम ने कहा, आज तक उन्हें किसी जांच की नोटिस तक नहीं मिली थी और अचानक एसडीएम जांच करने पहुंच गए। उनके मुताबिक, ये सामान्य घटना बिल्कुल नहीं है। आरोप लगाया, उनके बेटे उदयवीर को एसडीएम के सुरक्षा कर्मियों ने लगभग सौ मीटर तक दौड़ाकर पकड़ा और गाड़ी में बंधक बना लिया। बाद में ग्रामीणों ने उसे छुड़ाया।


25-30 फुट तक बालू निकल रही थी, प्रशासन को नहीं दिखा?

लालाराम राजपूत ने क्षेत्र में कथित अवैध बालू खनन का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा, एसडीएम बाढ़ चौकी के निरीक्षण और मॉकड्रिल की तैयारी देखने पहुंचे थे। पर, गर्रा नदी की बीच धार (बेड) से 25 से 30 फुट तक बालू निकाली जा रही थी, लेकिन प्रशासन को यह नहीं दिखाई दिया। सवाल उठाया, एसडीएम को अन्नपूर्णा भवन-आरआरसी सेंटर की खामियां दिखाई दीं, अवैध खनन नहीं दिखा।


विवाद के बाद हटाई गईं पोकलैंड-जेसीबी मशीनें, खनन अधिकारी काट रहे कन्नी

घटना के बाद क्षेत्र में चल रहा खनन कार्य बंद करा दिया गया था। अब जानकारी सामने आ रही है कि खनन स्थल पर लगी तीन पोकलैंड और जेसीबी मशीनों को वहां से हटा लिया गया है। स्थानीय लोग इसे खनन से जुड़े लोगों का बचाव में उठाया कदम मान रहे हैं। ग्रामीणों के बीच चर्चा है कि विवाद बढ़ने और प्रशासनिक निगाहें पड़ने के बाद मशीनें हटाई गईं ताकि आगे जांच की स्थिति में कार्रवाई से बचा जा सके। हालांकि प्रशासन की ओर से इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इस संबंध में जानकारी के लिए खनन अधिकारी शिवदयाल सिंह को दो बार कॉल किए जाने के बावजूद उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।


परियल कांड पर पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष का लगातार ’फायर’

भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष सौरभ मिश्र नीरज लगातार पोस्ट कर प्रशासनिक कार्रवाई और पुलिस रवैये पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने लिखा- जांच हो, एसडीएम का सर फाड़ने वाले जेल जायें। ग्रामीणों से अकारण गाली गलौज, मारपीट करने वालों पर भी मुकदमा लिखे, जेल जाये, प्रशासन के उत्पीड़न में एक बच्ची की हत्या, दर्जनों निर्दोष ग्रामीणों को पीटने वाले, घर में तोड़फोड़ करने वालों पर भी मुकदमा हो, कोई बख्शा न जाये। एक अन्य पोस्ट में उन्होंने कहा- एक लड़की की मौत, दो महिलाओं के हाथ तोड़े, सैकड़ों निर्दोष लोगों के घरों में तोड़फोड़ की, पूरे गांव की महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों को दौड़ाया और पीटा।


सौरभ बोले- परियल वालों पर अत्याचार के विरुद्ध खड़ा होना पाप, तो हमेशा करने वाला

सौरभ ने कहा, परियल गांव के निर्दोष ग्रामीणों पर अत्याचार के विरुद्ध खड़ा होना पाप है तो यह पाप मैं हमेशा करने वाला हूं। आप कार्यवाही के नाम पर निर्दोषों पर टेरर कायम नहीं कर सकते। कमाई के लोभ में अथवा जातीय आधार पर आप अत्याचारियों को बचाने के लिए जितने भी प्रयास करोगे वह उतने ही नंगे होते जायेंगे और हम अपनी जान लगा देंगे निर्दोष गांव वालों पर अत्याचार करने वालों को एक्सपोज करने में। अभी थम जाओगे तो सभी के हित में होगा।


बच्ची की मौत पर पुलिस ने दी सफाई

वहीं पुलिस ने सोशल मीडिया पर लगाए जा रहे आरोपों को निराधार बताया है। पुलिस के अनुसार राममोहन की आठ वर्षीय बेटी रूबी पिछले 17-18 दिनों से बीमार थी और उसे तेज बुखार था। अपर पुलिस अधीक्षक पश्चिमी मार्तण्ड प्रकाश सिंह का कहना है, गांव में मौजूद टीम ने वाहन की व्यवस्था कर बच्ची को परिजनों के साथ अस्पताल भिजवाया था।


हमला एसडीएम पर, परतें सिस्टम की खुलीं

अब सवाल सिर्फ प्रशासनिक अधिकारी पर हमले का मामला नहीं रह गया है। अवैध खनन, पुलिस की बर्बर कार्रवाई, ग्रामीणों के आरोप, राजनीतिक बयानबाजी और सोशल मीडिया की जंग, इन सबने मामले को बहुस्तरीय बना दिया है। फिलहाल पूरे जिले की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच आखिर किन-किन स्तरों तक पहुंचती है और जिम्मेदारी किसकी तय होती है, जिसके अभी तक प्रशासन की ओर से कोई संकेत नहीं मिले हैं।

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